लड़कियों की उम्र जांच में हुई गड़बड़ी : नीना

Meerut Updated Fri, 10 Aug 2012 12:00 PM IST
मेरठ। कबाड़ी बाजार से दो सप्ताह पूर्व मुक्त कराईं गईं लड़कियों की उम्र जांच में गड़बड़ी हुई है। ये आरोप लगाया है कि राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग की सदस्य नीना पी नायक ने। उन्होंने कहा कि प्रशासन की लापरवाही के चलते मुक्त कराई गई लड़कियां वापस देह व्यापार में जा रहीं हैं। आयोग की सदस्य गुरुवार को मेरठ में थीं। उन्होंने नारी निकेतन और कबाड़ी बाजार ( रेड लाइट एरिया) का दौरा किया।
स्वयं सेवी संस्था गुड़िया ने 27 जुलाई को पुलिस और प्रशासन के सहयोग से कबाड़ी बाजार में अभियान चलाया था। इसमें कई कोठों से 31 लड़कियों को मुक्त कराया गया था। मेडिकल जांच में पाया गया कि 25 लड़कियां नाबालिग हैं। पांच कोठा संचालिकाओं को जेल भी भेजा गया था। अभियान के दौरान प्रशासन के रवैये पर गुड़िया संस्था के अध्यक्ष अजीत सिंह ने सवाल उठाए थे। उन्होंने मामले की सूचना राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग को दी। इस पर गुरुवार को आयोग की सदस्य नीना पी नायक ने मेरठ के कबाड़ी बाजार और नारी निकेतन में जांच की। नीना पी नायक ने बताया कि कबाड़ी बाजार में कई कोठाें की स्थिति को देखा। इस दौरान उन्होंने कोठा संचालिकाओं से उनकी समस्याओं पर बात की। बाद में नारी निकेतन में मौजूद 25 लड़कियों से बात की और उनकी मेडिकल रिपोर्ट देखी। नीना पी नायक ने बताया कि इनमें से अधिकांश लड़कियों ने बताया कि वह अपनी मर्जी से इस धंधे में आई हैं। वापस वहीं जाना चाहती है। कुछ लड़कियों ने अपने घर वापस जाने की बात कही। उन्होंने बताया कि इन लड़कियों की मेडिकल रिपोर्ट भी संदिग्ध है, क्योंकि जो उम्र इन लड़कियों की देखने में लगती है, मेडिकल रिपोर्ट में उससे कहीं अधिक है। ऐसे में इनका दोबारा मेडिकल परीक्षण कराने के लिए वह आयोग के माध्यम से शासन को पत्र लिखेंगी। उन्होंने कहा कि इन लड़कियों की अभी तक काउंसिलिंग नहीं हुई है, ये सरासर लापरवाही है। नीना पी नायक ने कहा कि कई और गोपनीय मामले सामने आये, जिन पर वह आयोग को रिपोर्ट देंगी। उन्होंने कहा कि मेरठ में महिलाओं के शेल्टर हाउस की सबसे अधिक जरूरत है। उनके साथ आयोग के सीनियर काउंसिलर संजय तिवारी, गुड़िया संस्था के अध्यक्ष अजीत सिंह और चाइल्ड हेल्प लाइन के रोहित गोयल मौजूद थे।

कोर्ट भी उठा चुका अंगुली
पिछले दिनों कोर्ट ने एक ही लड़की की अलग-अलग मेडिकल रिपोर्ट में अलग-अलग उम्र बताने पर स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारियों को कटघरे में खड़ा किया था। सीजेएम स्पेशल कोर्ट में चल रहे किशोरी से दुष्कर्म मामले में अदालत को मेडिकल रिपोर्ट में दिए उम्र पर संदेह हुआ था। कोर्ट ने इसकी जांच के आदेश दिए थे। दूसरी बार मेडिकल बोर्ड ने रिपोर्ट दी थी। पहली रिपोर्ट में पीड़िता की उम्र लगभग 18 बताई गई, दूसरी में 17 से 18 के बीच होने की बात कही गई। कोर्ट ने तीसरी बार जब पूछताछ की तो उम्र 18 से कम बताई गई। 30 जुलाई को मामले की सुनवाई के दौरान सीजेएम वीपी वर्मा ने इसे आपराधिक षडयंत्र करार दिया था और सीएमओ सहित जिले के तमाम स्वास्थ्य अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के आदेश दिए थे।

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