‘रिफांपिसिन’ बिना कैसे ठीक होगी टीबी

Meerut Updated Fri, 10 Aug 2012 12:00 PM IST
मेरठ। शहर के हजारों टीबी (क्षय रोग) मरीजों पर दवाओं की कमी के चलते उससे भी जटिल स्थिति में पहुंचने का खतरा मंडरा रहा है। टीबी की बेस लाइन दवा ‘रिफांपिसिन’ लंबे समय से डॉट्स सेंटर नहीं पहुंच रही है। दवा की सप्लाई न होने से साधारण टीबी मरीजों में मल्टीपल ड्रग रजिस्टेंस (एमडीआर) टीबी की आशंका बढ़ गई है। मरीजों के परेशानी के साथ-साथ दवा का विकल्प नहीं होने से स्वास्थ्य विभाग की भी मुसीबत कम नहीं हो रही है।
टीबी की बेस लाइन दवा ‘रिफांपिसिन’ की डिमांड बढ़ने के साथ ही इसकी आपूर्ति कम हो गई है। इस कारण डॉट्स सेंटर पर कई महीनों से यह दवा नहीं आ रही है। इससे मरीजों का इलाज प्रभावित हो रहा है। आपको बता दें टीबी का इलाज यदि किसी कारणवश बीच में छोड़ दिया जाता है तो यह और भी खतरनाक हो जाता है। मरीज की रोग प्रतिरोधकता कम हो जाती है। साधारण टीबी की दवा असर करना बंद कर देती है। मरीज एमडीआर -टीबी की ओर बढ़ने लगता है।
क्या है डॉट्स
अधिकांश टीबी मरीज किसी न किसी कारणवश बीच में ही इलाज छोड़ देते थे। इसे रोकने के लिए जिला टीबी अस्पताल के अंतर्गत क्षेत्रों की जनसंख्या के अनुसार डायरेक्ट आब्जर्वेशन ट्रीटमेंट सर्विस (डॉट्स) सेंटर बनाए गए। इसके तहत मरीज सेंटर आते हैं और डॉट्स प्रोवाइडर के सामने ही दवा खाते हैं। इसके अलावा जो मरीज सेंटर आना बंद कर देते हैं, उनकी पहचान कर डॉट्स प्रोवाइडर घर जाते हैं और इलाज शुरू करने के लिए प्रेरित करते हैं। मेरठ को भी सात जोन में बांटा गया और छह सौ से ज्यादा डॉट्स सेंटर बनाए गए। मरीजों को यहीं से 15 दिन और एक महीने की दवाएं मुहैया कराई जाती हैं। इन सभी सेंटरों पर ही ‘रिफांपिसिन’ नहीं पहुंच रही है। ऐसे में दवाएं इस दवा के बिना ही दी जा रही हैं।
जानलेवा है इलाज छोड़ना
टीबी का शत प्रतिशत इलाज संभव है। सामान्य रोगियों के लिए छह से आठ माह तक का कोर्स होता है। बीच में इलाज छोड़ने से यही साधारण टीबी मल्टी ड्रग रजिस्टेंस (एमडीआर) टीबी का रूप ले लेती है। एमडीआर टीबी साधारण टीबी का जटिल रूप है। इसका इलाज दो साल तक चलता है। इसमें मरीजों की मौत तक भी हो सकती है।
इनकी सुनिए
डॉट्स सेंटर पर दवाओं का पैकेट पहुंच रहा है। ‘रिफांपिसिन’ की कमी के बारे में जानकारी नहीं दी गई है। ऐसा है तो यह गंभीर मामला है। तत्काल इस दवा की कमी पूरी की जाएगी।
- अमीर सिंह चौहान, सीएमओ

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