वाहन कम, ड्राइविंग लाइसेंस ज्यादा

Meerut Updated Fri, 10 Aug 2012 12:00 PM IST
मेरठ। आरटीओ में ड्राइविंग लाइसेंस (डीएल) इस कदर बट रहे कि जनपद में तो वाहनों से ज्यादा डीएल हो गए हैं। डीएल की औपचारिकता में दलालों की दखल इसे और आसान बना रही। युवाओं में डीएल बनवाने का गजब का क्रेज देखने को मिल रहा है। जनपद छोटे-बड़े करीब पांच लाख वाहन रजिस्टर्ड हैं, जबकि डीएल सात लाख के आसपास हैं। फर्जीवाड़ा पकड़े जाने के बावजूद डीएल पुराने ढर्रे पर ही बनाए जा रहे हैं।
सरकार ने डीएल बनवाने की एक निश्चित प्रक्रिया रखी है। लर्निंग लाइसेंस के लिए अभ्यर्थी को डेट ऑफ बर्थ सर्टिफिकेट, एड्रेस प्रूफ, चार फोटो आदि के अलावा लिखित परीक्षा देनी होती है। परीक्षा पास करने के बाद ही अभ्यर्थी को लर्निंग लाइसेंस दिया जाता है। इसके एक महीने बाद से लेकर छह महीने के अंदर परमानेंट लाइसेंस के लिए अभ्यर्थी को तय फीस के अलावा वाहन चलाकर दिखाना होता है लेकिन इस प्रक्रिया को दलालों ने आसान कर रखा है। दलालों की शरण में गए अभ्यर्थी बिना औपचारिकता के ही डीएल हासिल कर लेते हैं।
दिल्ली वाले मेरठ में बनवा रहे डीएल
आरटीओ सूत्रों की मानें तो दिल्ली में डीएल प्रक्रिया जटिल एवं पारदर्शी होने के चलते वहां के लोग भी मेरठ की ओर रुख करते हैं। दलाल फर्जी आईकार्ड तैयार करके उनका लाइसेंस भी बनवा देते हैं। अगर लाइसेंस अधिकारी फार्म के साथ फोटो कॉपी के रूप में नत्थी किए गए कागजों की मूल कॉपी गंभीरता से चेक करें तो रोजाना एक दो मामले पकड़ में आ सकते हैं।
लाइसेंस फीस दो सौ वसूल रहे 1200
लर्निंग लाइसेंस की फीस 60 और परमानेंट लाइसेंस की 140 रुपये है। 200 रुपये में बनने वाले लाइसेंस के लिए दलाल 1200 रुपये तक वसूल रहे हैं।
बोलते आंकड़े
जनपद में छोटे बड़े वाहन- करीब 5 लाख
नॉन प्रोफेशनल लाइसेंस - करीब 6 लाख 90 हजार
प्रोफेशनल लाइसेंस - करीब 3 हजार
महीने में बनने वाले औसतन डीएल - करीब छह हजार
अधिकारी कहिन
डीएल का फर्जीवाड़ा रोकने के लिए वेब कैमरे से अभ्यर्थी की मौके पर ही फोटो खींची जाती है। लिखित परीक्षा और वाहन टेस्ट लेकर ही डीएल दिया जा रहा है। दलालों की एंट्री ऑफिस में बंद है। अगर कहीं कोई चूक हो रही है तो इसे दिखवाया जाएगा।
- बीपी गुप्ता, आरटीओ

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