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कैसे लक्ष्य हो पूरा, 18 दिन रहे शेष

Mau Updated Sun, 10 Feb 2013 05:30 AM IST
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मऊ। धान खरीद की अंतिम तिथि में मात्र 18 दिन ही शेष रह गए हैं, लेकिन एफसीआई के अडि़यल रवैए से ज्यादातर धान क्रय केंद्रों पर ताला लटक रहा है। हालत यह है कि अब तक सिर्फ 9974.73 एमटी ही धान खरीद हो सकी है। किसानों का 1246.86 लाख के सापेक्ष 968.82 लाख रुपये का ही भुगतान किया गया है। इधर, प्रशासन का दावा है कि लक्ष्य पूरा कर लिया जाएगा।
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किसानों को धान की फसल का उचित मूल्य दिलाने के लिए जनपद में 54 धान क्रय केंद्र खोले गए हैं। मार्केटिंग इंसपेक्टरों की हड़ताल के बाद एफसीआई द्वारा चार प्रतिशत कटौती पर समझौता किया गया था। लेकिन एफसीआई के अधिकारियों द्वारा 16 प्रतिशत कटौती किए जाने के चलते मिलरों ने भी हाथ खड़ा कर दिया है। हालत यह है कि क्रय केंद्रों से निकासी न होने के चलते ज्यादातर धान क्रय केंद्रों पर ताला लटक रहा है। विपणन शाखा के 12 क्रय केंद्रों पर धीमी गति से धान खरीद हो रही है। धान खरीद की अंतिम तिथि 28 फरवरी निर्धारित की गई है। अब तक सिर्फ 2339 किसानों से 9974.73 एमटी ही धान खरीद हो सकी है। किसानों को 1246.86 लाख के सापेक्ष 968.84 लाख का ही भुगतान हो पाया है। अभी 278.02 लाख का बकाया चल रहा है। जबकि 36900 एमटी धान खरीद का लक्ष्य निर्धारित है। प्रशासनिक अधिकारी एफसीआई द्वारा मिलरों का घटिया चावल रिजेक्ट करने का रोना रो रहे हैं। शासन प्रशासन की ढुलमुल धान खरीद नीति से आढ़तियों के पौ बारह हैं। वह किसानों से धान की फसल को औने पौने दाम में खरीद रहे हैं। जो किसान अपने धान को किसी तरह घर में रखे भी हैं तो वह अब खराब होने की स्थिति में पहुंच रहा है। वह अपने धान को बेचने के लिए अधिकारियों से गुहार लगा रहे हैं।


किसानों के माथे पर लकीरें गहराई
धान खरीद में तेजी न आने से किसानों के चेहरे पर हवाइयां उड़ने लगी है। जयनाथ सिंह, रामकुंवर चौहान, लालधर यादव, सुदामा सिंह का कहना था कि खुले आसमान में कई रात बिताने के बाद भी बैरंग लौटना पड़ रहा है। धान खरीद होने की उम्मीद कम ही लग रही है। उन्होंने स्टेट पुल योजना के तहत धान खरीद करने की मांग की।


डीएम ने नहीं किया फोन रिसीव
जनता की समस्याओं के त्वरित निस्तारण के लिए प्रशासनिक अधिकारियों की 24 घंटे जवाबदेही निश्चित की गई है। धान खरीद के मुद्दे पर जिलाधिकारी की मोबाइल पर तीन बार रिंग की गई। लेकिन मोबाइल रिसीव नहीं हुआ।

अपर जिलाधिकारी पीपी सिंह का कहना था कि एफसीआई मिलरों के चावल को घटिया बताकर वापस कर दिए जाने से धान खरीद प्रभावित हो रही है। लक्ष्य को पूरा करने का प्रयास जारी है।

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