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बंदी का गला काट जेल अस्पताल में फेंका

Mau Updated Wed, 26 Dec 2012 05:30 AM IST
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मऊ। जिला कारागार में भी अपराधी बेलगाम हैं। मंगलवार शाम को कुछ बंदियों ने एक बंदी को जेलर का मुखबिर बताकर उसके गले पर धारदार हथियार से वार कर दिया। गंभीर रूप से घायल कैदी के जेल अस्पताल के पास फेंक दिया। गिनती के दौरान मामला प्रकाश में आने पर जिला कारागार में हड़कंप मच गया। कैदी को गंभीरावस्था में जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। कोपागंज थाना क्षेत्र के चेराराम का पुरा निवासी राधेश्याम तिवारी पुत्र बच्चालाल तिवारी हत्या के प्रयास सहित विभिन्न मामलों में जिला जेल में बंद है। जेल में इसे जेलर के मुखबिर के नाम से भी जाना जाता है। इसके चलते अन्य बंदी उससे खार खाए रहते थे। बंदियों का मानना है कि जेल में जो भी अवैध कृत्य होते हैं उसकी सूचना यही जेलर तक पहुंचाता है। जिला अस्पताल में भर्ती बंदी राधेश्याम तिवारी के अनुसार मंगलवार को बलिया जनपद के अजीत चौबे, अरूण चौबे और रवींद्र कुमार आदि ने उस पर जेलर के मुखबिर होने का आरोप लगाते हुए धारधार हथियार से उसके गले पर प्रहार किया और अधमरा कर उसे अस्पताल की गैलरी में फेंक दिया। उधर शाम को जब बैरकों में कैदियों की गिनती शुरू हुई तो राधेश्याम तिवारी का पता नहीं लगा। इस दौरान जेल में हड़कंप मच गया। आननफानन में उसकी तलाश शुरू हुई तो उसे अस्पताल गैलरी से बरामद किया गया। जहां से जिला अस्पताल लाकर उसे भर्ती कराया गया। घटना के बाद जेल में हड़कंप मचा हुआ है वहीं जेल प्रशासन के भी हाथ पांव फूले हुए हैं।
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आखिर जेल के बंदी रक्षक कहां थे
मऊ। जिला जेल में बंदी को अधमरा कर फेंकने की घटना के बाद जेल प्रशासन पर यह सवाल उठना लाजमी है कि आखिर इतनी बड़ी जेल में कैदी क्या वाकई बेलगाम है। यदि नहीं तो फिर बंदी रक्षक उस समय कहां थे जब राधेश्याम तिवारी को पीटा जा रहा था और उस पर जानलेवा हमला कर उसे अस्पताल गैलरी में फेंक दिया गया। दिन में हुई घटना की जेल प्रशासन को सूचना तब हुई जब बंदियों की गिनती शुरू हुई। खैर देर से ही सही जेल प्रशासन जागा और उसे अस्पताल लाकर भर्ती कराया। बंदी के गर्दन पर धारधार हथियार से हमला किया गया है। इसके चलते उसकी हालत गंभीर बनी है।

तो क्या वाकई जेल में होते हैं अवैध कार्य
मऊ। जिला जेल में बंदी राधेश्याम तिवारी पर प्राणघातक हमले ने एक बात तो स्पष्ट कर दी है कि वाकई जेल में कुछ गड़बड़ है। जेल में अवैध कार्यों की जानकारी जेलर को भी समय समय पर मिलती रहती थी इसी के चलते कैदी राधेश्याम से खार खाए हुए थे। बावजूद इसके समय रहते जेलर ने अवैध कार्य करने वालों पर कार्रवाई क्यों नहीं की थी। यह खुद जेल प्रशासन पर एक सवालिया निशान खड़ी करती है। यदि राधेश्याम जेलर का मुखबिर था तो उसकी सूचना पर जेल प्रशासन कार्रवाई क्यों नहीं करता था। समय रहते यदि इस कार्य पर रोक लगती तो इसकी सजा राधेश्याम को भी नहीं भुगतनी पड़ती।

जेलर की नहीं उठ रही मोबाइल
मऊ। जिला जेल में बंदी पर प्राणघातक हमला होने के बाद भी जेलर का मोबाइल किसी भी घटना के बारे में कुछ बताने में नहीं उठा। मोबाइल पर बार बार घंटी जाने के बाद भी किसी प्रकार की कोई जानकारी उनसे प्राप्त नहीं हुई।

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