नहीं हो सकी विवाहिता के बलात्कार की पुष्टि

Mau Updated Sat, 22 Dec 2012 05:30 AM IST
मऊ। रोडवेज के विश्रामालय में विवाहिता की आबरू पर हमले के मामले में शुक्रवार को विवाहिता के चिकित्सकीय परीक्षण में बलात्कार की पुष्टि नहीं हुई है। गुरुवार को एसपी ने छेड़खानी की रिपोर्ट को बलात्कार में तरमीम करने के बाद विवाहिता का मेडिकल परीक्षण का आदेश दिया था। तीनों आरोपियों का भी मेडिकल मुआयना कराया गया लेकिन कुछ हाथ नहीं लगा है। पुलिस अब विधि विज्ञान प्रयोगशाला लखनऊ की मदद लेगी।
आजमगढ़ जनपद के महाराजगंज थाना क्षेत्र की एक विवाहिता ने मंगलवार रात रोडवेज परिसर में आबरू पर हमला का सनसनीखेज आरोप तीन लोगों पर लगाया था। आजमगढ़ और नगर के तीन चिकित्सकों ने शुक्रवार को उक्त विवाहिता का चिकित्सकीय परीक्षण किया। सूत्रों के अनुसार पुलिस विवेचना में एक अलग किस्म की कहानी सामने आई है। इसके मद्देनजर पुलिस ने एक पार्टी के नेता को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की तो उन्होंने बताया कि बलात्कार की घटना नहीं हुई थी। रंजिश के चक्कर में दो अन्य नेताओं के कहने पर मैंने उनका सहयोग किया था। बलात्कार की झूठी कहानी गढ़ी गई थी। शहर कोतवाल भैयालाल सिंह ने बताया कि मेडिकल रिपोर्ट में प्रथमदृष्टया बलात्कार की पुष्टि नहीं हुई है। विवेचना जारी है, अभी कई नए चौंकाने वाले तथ्य सामने आएंगे। मामले में जो भी दोषी हैं या जानबूझकर षड्यंत्र रचे हैं वे बच कर कहीं नहीं जा पाएंगे। वहीं दूसरी ओर लखनऊ से आई छह सदस्यीय एफएसएल टीम ने शुक्रवार को मामले से संबंधित तथ्य एकत्रित करने के साथ ही जरूरी सैंपल जुटाए।

जनेऊ की कसम... नेताआें ने मोहरा बना दिया
पुष्पेन्द्र कुमार त्रिपाठी
मऊ। बेटा मति मारी गई थी... नेताओं ने मोहरा बना कर इस्तेमाल कर लिया... मैं तो मऊ आया ही नहीं था। कोई तो सुलह करा दो... बुढ़ापे में घर मरना चाहता हूं जेल में नहीं। मैं तो सत्यनारायण की कथा सुनाता था। लेकिन अब खुद किस्सा बन गया। कुछ यही बार-बार कहना था शुक्रवार को आजमगढ़ के देवारा हरखपुर निवासी रामसकल तिवारी का। शहर कोतवाली में पूछताछ के लिए बैठाया गया विवाहिता का ससुर शुक्रवार को बार-बार यही कह रहा था कि उसकी बहू के साथ कुछ हुआ ही नहीं था। कहा, चले थे अपना उल्लू सीधा करने, लेकिन नेताओं ने ऐसा उल्लू बनाया कि मरने के बाद ही इन तीनोें को भूल पाऊंगा।
आजमगढ़ की विवाहिता ने आबरू पर हमला करने के समय ससुर का भी साथ में होना बताया था। लेकिन अपने विरुद्ध चौतरफा साक्ष्य इकट्ठा होते देख और प्रथमदृष्टया मेडिकल रिपोर्ट में कुछ न मिलने पर ससुर घटना के वक्त मऊ मौजूद होने से ही मुकर गया। कहा, सारा मामला फर्र्जी औ बेबुनियाद है। वर्ष 1990 से गांव निवासी ओरी हरिजन से जमीन का मुकदमा लड़ रहा हूं। बाद में उसी जमीन के लिए प्रेमचंद से भी मुकदमेबाजी शुरू हो गई। दो वर्ष पहले मेरे मझले बेटे अनिल के ऊपर गांव के ही झिनकू ने अपनी पुत्री की छेड़खानी का आरोप लगाया था। जिस पर गांव में ही पंचायत बैठी और दंडस्वरूप मैने पांच हजार रुपये जुर्माना अदा किया। इससे दोनों से मन खिन्न रहता था। वहीं अंबेडकर नगर निवासी तिलकधारी से झिनकू और प्रेमचंद की बनती थी। जिस पर एक नेता ने मुझसे संपर्क कर कहा कि, कहो तो तुम्हारी मदद करूं। प्रेमचंद और झिनकू तुम्हारे दुश्मन हैं और तिलकधारी हमारा। बहू को कहो, बस थोड़ा सा निडर होकर बयान पुलिस के सामने देना होगा। बाकी सारे इंतजाम हो गए हैं। घबराना मत, मऊ के एक नेताजी भी तुम्हारी मदद को मौजूद रहेंगे। रामसकल ने बताया कि जब घटना की सारी पृष्टिभूमि रच ली गई तब बहू, पत्नी और छोटा बेटा मऊ आ गए। विवाहिता के ससुर ने फिर कहा कि, अब तो पुलिस झूठे मुकदमे के लिए मुझे भी नहीं छोड़ेगी। अब तो सब कुछ साफ हो गया है। चलिए किस्मत में लिखा था तो अब बिना भोगे जाएंगे कहां।

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