बीएसए, लेखाधिकारी के बीच उलझा शिक्षकों का वेतन

Mau Updated Tue, 18 Dec 2012 05:30 AM IST
मऊ। बीएसए और लेखाधिकारी के बीच मामला उलझने से परिषदीय विद्यालय के शिक्षकों का वेतन भुगतान दो माह से लंबित है। इससे उन्हें फांकाकशी का शिकार होना पड़ रहा है। सबसे ज्यादा परेशानी उन शिक्षकोें को हो रही है जो गैर जिलों से आए हैं या दूरस्थ क्षेत्रों में तैनात हैं। उधर, बीएसए का कहना है कि शिक्षक काम नहीं कर रहे हैं। इससे उनका वेतन बाधित है।
जिले में 1054 प्राथमिक तथा 442 उच्च प्राथमिक विद्यालय हैं। अध्यापन के लिए प्राथमिक विद्यालयों में 4260 तथा 1404 उच्च प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षकों की तैनाती की गई है। विभिन्न जिलों से 186 शिक्षकों को समायोजित किया गया है। अक्तूबर से ही वेतन न मिलने से शिक्षकों की मुश्किलें बढ़ती ही जा रही है। अभी पिछले महीने शिक्षकों ने वेतन के लिए आंदोलन भी किया था। बावजूद मामले को लटका दिया गया है। महकमे ने पहले तो फीडिंग का मामला बताकर वेतन बाधित किया था। वेतन न मिलने से दशहरा का त्यौहार फीका पड़ गया। अब नया साल भी फीका होने का संयोग बनता नजर आ रहा है। कई माह से वेतन न मिलने से शिक्षकाें को कर्ज लेकर काम चलाना पड़ रहा है। जिन शिक्षकों को दूरस्थ क्षेत्रों में तैनात किया गया है उनके सामने तो भुखमरी की स्थिति उत्पन्न हो गई है। शिकायत के बाद भी सुनवाई न होने से शिक्षक लामबंद होने लगे हैं। कुल मिलाकर वेतन का मामला जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी और वित्त और लेखाधिकारी के बीच उलझ कर रह गया है।

खंड शिक्षा अधिकारियों ने नहीं भेजी बिल
मऊ। जिले के परिषदीय विद्यालयों के शिक्षक वेतन बाधित होने से परेशान हैं। यही नहीं 86 हजार रुपये के वेतन अंतर और महंगाई भत्ते के बकाया की बिल भी अभी तक खंड शिक्षा अधिकारियों द्वारा प्रस्तुत तक नहीं की जा सकी है। ऐसे में दिसंबर माह का वेतन भी लटकने के आसार नजर आ रहे हैं।

वेतन न मिलने से शिक्षकों मेें उबाल
फोटो
मऊ। दो माह से बकाया वेतन के मामले में अधिकारियों के तानाशाह रवैए के खिलाफ शिक्षकों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। शिक्षक संघर्ष समिति के वरिष्ठ उपाध्यक्ष अंजनी सिंह ने कहा कि लगातार दो माह से वेतन न मिलने से बच्चों की फीस तक नहीं जमा हो पाई है। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी द्वारा सभी शिक्षकों पर काम न करने की टिप्पणी अशोभनीय है। समय पर वेतन भुगतान नहीं किया तो हम लोग चुप नहीं बैठेंगे। शिक्षक नेता सतीश सिंह, अरविंद सिंह का कहना है कि वेतन सहित अन्य भुगतान बाधित होने से परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हो गया है। इसी प्रकार ज्ञानचंद कन्नौजिया, सुनील सिंह का कहना है कि अधिकारियों के अडि़यल रवैए के चलते ही वेतन बाधित है। इसी तरह अनिल कुमार गुप्ता का कहना है कि लगातार कई माह से वेतन न मिलने से असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। साहूकारों से अधिक ब्याज पर कर्ज लेकर काम चलाना पड़ रहा है।

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