अपंजीकृत दुकानों पर बिक रहीं दवाएं

Mau Updated Thu, 06 Dec 2012 05:30 AM IST
मऊ। जिले में सैकड़ों अपंजीकृत मेडिकल की दुकानों के माध्यम से ड्रग माफिया चांदी काट रहे हैं। औषधि विभाग में सिर्फ 662 दुकानों का ही पंजीयन है। जो अपंजीकृत दुकानें संचालित हैं उन पर छापेमारी के नाम पर विभाग द्वारा गठित टीमें यूं तो हर माह मुआयना जरूर करती हैं। लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने से अपंजीकृत मेडिकल स्टोरों से धड़ल्ले से दवाओं की बिक्री की जा रही है। इससे जहां एक तरफ विभाग को लाखों रुपये राजस्व का चूना लगता है वहीं कागजी खानापूर्ति के नाम पर विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की जेबें भी गर्म होती हैं।
जिले में दवा की बिक्री के लिये औषधि विभाग द्वारा मुख्य रूप से दो प्रकार के लाइसेंस थोक व फुटकर के रूप में जारी किए जाते हैं। जबकि दशकों पूर्व ग्रामीण अंचलों में सर्दी, जुकाम आदि सामान्य रोगों की कुछ सामान्य दवाओं के लिये जारी लाइसेंस जारी होने पर प्रतिबंध की वजह से उनका मात्र नवीनीकरण ही किया जाता है। सबसे अधिक चौंकाने वाले तथ्य यह है कि जिलेभर में सिर्फ 662 मेडिकल की दुकानें ही विभाग के कागजों में पंजीकृत हैं। इसमें थोक बिक्री के लिए 272, फुटकर के लिए 245 और रिस्टेकटेड के लिए 145 दुकानें शामिल हैं। लेकिन सच्चाई यह है कि विभाग के आंकड़ों में जितनी दुकानें पंजीकृत के रूप में संचालित हैं। उससे कहीं अधिक दुकानें अपंजीकृत के रूप में संचालित होने से ड्रग माफिया धड़ल्ले से दवाओं की बिक्री कर रहे हैं। विभाग के अधिकारियों का दावा है कि वे समय-समय पर औषधि की पंजीकृत दुकानों पर छापेमारी कर कार्रवाई करते हैं। इससे लोग गलत दवाओं का इस्तेमाल न करें। छापेमारी के नाम पर गठित टीमें छापेमारी के लिये प्रत्येक माह निकलती हैं लेकिन कार्रवाई के नाम पर विभाग फिसड्डी ही साबित होता है। सूत्रों की माने तो ऐसी दुकानों से विभाग का कमीशन भी बंधा होता है। पंजीकृत दुकानों पर अनियमितता एवं सैकड़ों अपंजीकृत दुकानों पर नकेल नहीं कसे जाने से ही ड्रग माफिया पूरी तरह से सक्रिय होकर धड़ल्ले से दवाओं की बिक्री कर रहे हैं। हालत यह है कि पंजीकरण और नवीनीकरण के लिये सैकड़ाें से अधिक दुकानदार महीनों से गणेश परिक्रमा करने को विवश हो रहे हैं। बावजूद इसके उनका लाइसेंस नहीं जारी किया जा रहा है।

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