दीपावली पर महंगाई की गाज, लगन ने रखी लाज

Mau Updated Tue, 06 Nov 2012 12:00 PM IST
मऊ। दशहरा बीतने के बाद कभी दीपावली मनाने की तैयारी शुरू हो जाती थी। घरों में रंग-रोगन और साफ सफाई का कार्य शुरू हो जाता था लेकिन रंगाई-पुताई के सामानों में अत्यधिक वृद्धि ने न सिर्फ दीवारों का रंग फीका कर दिया है बल्कि लोगाें के खुशी का उत्साह भी कम कर दिया है। शुक्र है नवंबर और दिसंबर माह में शुभ मुहूर्त में शादी विवाह के लगन का कि कारोबारियों को थोड़ी राहत मिल रही नहीं तो ज्यादातर कारोबारी हाथ पर हाथ धरे ही बैठे हैं।
महंगाई ने खाने पीने की वस्तुओं पर ही नहीं बल्कि लोगों के खुशियों पर भी ग्रहण लगाया है। तीज त्योहारों को महंगाई ने इस कदर अपनी आगोश में लिया है कि लोग तैसे तैसे काम चला रहे हैं। दीपावली का त्योहार आते ही पहले लोग दो सप्ताह पहले से ही साफ सफाई एवं रंगाई पुताई का कार्य कराने लगते थे लेकिन इस बार उनका उत्साह काफी ठंडा पड़ गया है। गिने चुने उच्च वर्ग या फिर शादी विवाह वालों घरों में ही रंगाई पुताई का कार्य दिखाई दे रहा है। पेंट कारोबारी भी हाथ पर हाथ धरे बैठें हैं। शुक्र है कि नवंबर और दिसंबर माह में कुछ लगन ने लाज रखी है अन्यथा दीपावली की हनक तो इस बार गायब ही दिख रही है। बाजार में लोगों की पसंद बने प्लास्टिक पेंट की कीमत पहले जहां 2100 रुपये डिब्बा प्रति 20 लीटा थी वहीं अब यह 2300 से भी अधिक हो गई है। डिस्टेंपर भी 1050 से 1150 रुपया डिब्बा पहुंच चुका है। वेदर क्लासिकल पेंट भी 3500 से 3900 हो चुका है। हालांकि समोसम के दामों में इस बार खास वृद्धि नहीं हुई है लेकिन प्रचलित रंगाई पुताई के साधारण पेंट भी 140 से बढ़कर 200 रुपये से अधिक में प्रति लीटर बिक रहे हैं।

पुट्टी का क्रेज बढ़ा
मऊ। समय के साथ रंगाई पुताई पर भी आधुनिकता एवं फिनीसिंग का क्रेज बढ़ा है। आज अधिकांश लोग घरों को रंगाई पुताई कराने से पहले पुट्टी का इस्तेमाल कर रहे हैं। कारोबारी दिनेश यादव कहते हैं कि इससे जहां दीवारों की लाइफ बढ़ जाती है वहीं सिलन या फिर पेंट आदि के छोड़ने की समस्या खत्म हो जाती है। बताया कि यह ट्रीटमेंट थोड़ा महंगा जरूर है लेकिन वर्तमान समय में इसकी क्रेज काफी बढ़ी है। दो कमरों के एक अटैच रूमों की रंगाई पुताई में कम से कम 30 से 35 हजार रुपये खर्च हो रहे हैं।

गरीबों और मध्यम वर्ग भा रहा चूना
मऊ। कभी रंगाई पुताई में ज्यादातर चूने का ही प्रयोग होता था लेकिन आज यह गरीबों और मध्यम वर्ग के लोगों के लिए सहारा बना हुआ है। महंगाई के इस दौर में जो मध्यमवर्गीय लोग घरों की रंगाई पुताई करा रहे हैं वह चूने का ही इस्तेमाल ज्यादा से ज्यादा कर रहे हैं। चूने में मिलाने के लिए अलग अलग प्रकार के केमिकल भी बाजार में आ गए हैं जो वह डिस्टेंपर एवं समोसम की तरह टिकाऊ साबित हो रहे हैं।

कारीगरों की मजदूरी भी बढ़ी
मऊ। रंगाई पुताई के सामानों में वृद्धि के साथ ही मजदूरी में भी काफी इजाफा हुआ है। रंगाई पुताई का कार्य ज्यादातर ठीके पर ही संचालित हो रहे हैं। वहीं दैनिक मजदूरी भी कारीगरों की 250 रुपये तक हो गई है। पहले यह मजदूरी 150 से 200 रुपये ही थी लेकिन अब मजदूरों की मजदूरी 150 से 200 तक पहुंच चुकी है जबकि कारीगर 250 रुपये से कम में काम करने को तैयार नहीं हो रहे हैं।

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