रामलीला मंच से हुई राम सीता की वास्तविक शादी

Mau Updated Fri, 02 Nov 2012 12:00 PM IST
अमिला। रामलीला समिति ने दोहरीघाट ब्लाक के शक्करपुर छपरा गांव में राम-सीता की वास्तविक शादी बुधवार की देर रात वैदिक मंत्रोच्चार के बीच संपन्न कराई। इस दौरान सैकड़ों लोग पूरी रात शादी देखने के लिए टकटकी लगाए रहे। ऐतिहासिक एवं सचमुच की शादी ने समाज को एक प्रेरणा देने का काम किया है।
शक्करपुर छपरा गांव में एक दशक से रामलीला मंच पर धनुष यज्ञ के मौके पर सीता-राम की वास्तविक शादी संपन्न कराई। जो जनपद में आकर्षण का केंद्र रहा। बुधवार की देर रात राम की भूमिका में मऊ जनपद के खैरा पिड़सुुई निवासी ज्ञानचंद पुत्र हरिंद्र व सीता की भूमिका में मऊ जनपद के सूरजपुर निवासी मोनिका पुत्री रामदरस ने अदा कर धनुष टूटते ही वरमाला डालकर आजीवन परिणय सूत्र में बंधकर एक दूसरे का साथ निभाने की शपथ ली। कन्यादान शक्करपुर छपरा गांव के प्रधान राकेश राकेश उर्फ पप्पू ने किया। शक्करपुर छपरा गांव आठ पुरवों में बसता है। लेकिन रामलीला मंचन के दौरान रामायण के पात्रों को वास्तविक जिंदगी में बंधते देखने के लिए दर्शकों का हुजूम उमड़ पड़ा था। रात 10 बजे तक रामलीला देखकर लौटने वाले लीला प्रेमी आज वास्तविक रामलीला देखने के लिए इस कदर आतुर थे कि रात 12 बजे तक कोई अपने स्थान से हिला तक नहीं। उपहार के रूप में साइकिल, घड़ी, बर्तन दिया। वहीं दशरथ की भूमिका कर रहे लालजी ने स्वयं उपहार और नगदी दिया। वहीं पूर्व प्रधान फूलबदन सिंह ने भी उपहार दिए। दिनेश, रमेश, प्रेमचंद सिंह, रामभवन, बसंत, रामकेवल, दीपक सिंह, परशुराम, सुबाष आदि ने उपहार दिए।
राम के आंख में आंसू देख दर्शक भाव विह्वल
रतनपुरा। आदर्श रामलीला समिति रतनपुरा की ओर से चल रही रामलीला के आठवें दिन सीता हरण, रावण-जटायु युद्ध सहित विभिन्न लीलाओं का मंचन किया गया। जटायु द्वारा रावण को युद्ध के लिए बाध्य कर देने पर दर्शक जयश्रीराम का उद्घोष करने लगे। मृग के वेष मेें पंचवटी में पहुंचे मारीच ने जब राम व लक्ष्मण को छलावा देकर कुटी से बाहर बुला लिया जाता है तभी साधु के वेश में कुटी में पहुंचा। रावण द्वारा छल से माता सीता का हरण कर लिया जाता है। लंका जाते समय रास्ते में जटायु द्वारा माता सीता को छुड़ाने की कोशिश की जाती है, तभी रावण द्वारा जटायु का पंख काट दिया जाता है। जटायु द्वारा रावण को युद्ध के लिए बाध्य कर देने पर दर्शक जयश्रीराम का उद्घोष करने लगे। सीता की खोज में जब प्रभु राम वहां पहुंचते हैं तो जटायु द्वारा सीता के हरण का सारा वृतांत बताया जाता है। भगवान राम के आंखों में आंसू देखकर दर्शक भाव विह्वल हो गए।
बालि वध होते ही दर्शकों ने लगाया जयकारा
दोहरीघाट। क्षेत्र के सूरजपुर में चल रही रामलीला में रावण जटायु युद्ध, शबरी मिलन, बालि वध सहित विभिन्न लीलाओं का मंचन किया गया। इसमें भगवान राम के बालि का वध कर सुग्रीव का राज्याभिषेक किया। दर्शकों के जयकारे से वातावरण गूंज उठा।
भगवान राम के आने की सूचना मिलते ही प्रसन्न शबरी राम लक्ष्मण को जूठे बेर भगवान को देती है। भगवान द्वारा जूठे बेर ग्रहण करने पर दर्शक भाव विह्वल हो जाते हैं। शबरी से मिलने के बाद श्रीराम की मुलाकात हनुमान से होती है। इसके बाद सुग्रीव से उनकी मित्रता होती है। श्रीराम ने सीता को खोजने के लिए सुग्रीव से सहायता मांगी। सुग्रीव का दुख सुनते ही भगवान की आंखों से आंसू गिरने लगा। भगवान श्रीराम सात वृक्षों का सहारा लेकर बालि का वध करते है। बालि वध होते ही दर्शकों के जयघोष से वातावरण गुंजायमान हो गया।

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