राम विवाह पर महिलाओं ने गाया मंगलगीत

Mau Updated Sat, 20 Oct 2012 12:00 PM IST
दोहरीघाट/कुसुम्हा। नगर पंचायत के प्रांगण में चल रही रामलीला में धनुष यज्ञ, राम-सीता विवाह, परशुराम-लक्ष्मण संवाद सहित विभिन्न लीलाओं का मंचन किया गया। भगवान राम के धनुष तोड़ते ही पूरा पंडाल जयकारे से गूंज उठा। साथ ही महिलाओं ने मंगलगीत गाया। उधर गोठा में चल रही रामलीला में भरत मनावन का मंचन किया गया। भरत प्रेम देख श्रद्धालु भावविह्वल हो गए।
रामलीला मिथिला नरेश राजा जनक अपनी पुत्री सीता के विवाह के लिए स्वयंवर का आयोजन किया। इसमें उन्होंने शर्त रखा कि धनुष तोड़ने वाले से ही सीता विवाह होगा। शर्त को सुनकर देश-देश के राजा निश्चित तिथि पर आते हैं। देवलोक से देवता भी मनुष्य के रूप में शिरकत करते हैं। स्वयंवर की भरी सभा में रखी धनुष को बलशाली राजाओं द्वारा धनुष को तोड़ने में असफल देखकर लोग हंसते-हंसते लोटपोट हो गए। यह देख राजा जनक व्याकुल हो उठे। उनकी व्याकुलता देख मुनि विश्वामित्र ने भगवान श्रीराम को धनुष तोड़ने का आदेश दिया। क्षण भर में ही भगवान श्रीराम धनुष को उठा लेते हैं और प्रत्यंचा चढ़ाते ही धनुष टूट जाता है। इसके बाद मां सीता भगवान के गले में जयमाल डालती हैं। धनुष टूटते ही पूरा पंडाल जय श्रीराम के उद्घोष से गूंज उठा। महिलाएं मंगलगीत गाने लगीं। इसके बाद परशुराम-लक्ष्मण संवाद, राम-सीता विवाह सहित अन्य लीलाओं का मंचन किया गया। उधर गोठा में चल रही रामलीला में भरत मनावन का मंचन किया गया। रामलीला में भरत अपनी विशाल सेना लेकर चित्रकूट के लिए प्रस्थान किए। जुलूस काली चौक, रामजानकी मार्ग पश्चिम मुहाल होते हुए चित्रकूट स्थल फरसरा गांव में पहुंची। भरत की विशाल सेना को देखकर लक्ष्मण आक्रोशित हो गए। लेकिन जैसे ही राम को भरत के आने की सूचना मिली राम जैसे थे दौड़ पड़े राम को आते देख भरत इतने भावविह्वल हो गए कि रथ छोड़कर प्रभु राम के चरणों में गिरकर फफक फफक कर रो पड़े। उधर प्रभु श्रीराम के नेत्रों से अश्रु की धारा बह रही थी। इस कारुणिक दृश्य को देखकर फरसरावासियों की आंखें नम हो गई।

रामजन्म होते ही जयकारे से गूंज उठा पंडाल
करहां। आदर्श रामलीला कमेटी के तत्वावधान में करहां बाजार में रावण अत्याचार, रामजन्म सहित विभिन्न लीलाओं का मंचन किया गया। रामलीला मंचन में भगवान राम के जन्म होते ही जयश्रीराम से गूंज उठा। वहीं नगपुर गांव की रामलीला में राम वन गमन तथा भरत मिलाप का मंचन किया गया।
रामलीला में ऋषियों पर असुरों द्वारा कहर बरपाकर घड़े में रक्त को लेकर रावण के दरबार में पहुंचते हैं। आकाशवाणी होती है कि हे रावण यही रक्त तुम्हारे कुल के विनाश का कारण बनेगा। जिसे सुनकर घबरा उठा। तत्काल लंका सीमा से बाहर जनकपुर सीमा में रक्त के घड़े को गड़वाया। कुछ समय के पश्चात जनकपुर में अकाल पड़ा। उसके निवारण के लिए जनकपुर के राजा और रानी हल चला रहे थे कि उनका हल उक्त घड़े से टकरा गया। घड़े से कन्या की उत्पत्ति हुई। चौथापन देख राजा दशरथ चिंतित रहते हैं। ऋषि महर्षियों की शरण में जाते हैं। कुछ दिन बाद राजा को चार पुत्र राम, लक्ष्मण, भरत शत्रुघ्न का जन्म होता है। जन्म होते ही पंडाल में मौजूद दर्शक भाव विह्वल होकर जयकारा लगाने लगते हैं। महिलाएं थाली बजाने लगती हैं। महिलाएं मंगल गीत गाने लगती हैं। इसी क्रम में आदर्श रामलीला कमेटी के तत्वावधान में नगपुर गांव की रामलीला में राम वन गमन तथा भरत मिलाप का मंचन किया गया। मंचन के दौरान दशरथ विलाप पर दर्शकों की आंखें डबडबा गईं। वहीं राम-भरत प्रेम देख श्रद्धालु भावविभोर हो गए।

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