रामजन्म होते ही जयश्रीराम के जयकारे से गूंज उठा पंडाल

Mau Updated Fri, 19 Oct 2012 12:00 PM IST
अमिला। श्री ठाकुर द्वारा रामलीला समिति के तत्वावधान में चल रही रामलीला के मंचन में बुधवार को रामजन्म सीता की उत्पत्ति सहित विभिन्न लीलाओं का मंचन किया गया। रामजन्म होते ही पंडाल जय श्रीराम के जयकारे से गूंज उठा।
रामलीला के मंचन में दशानन रावण के तप से प्रसन्न होकर ब्रह्मा जी ने वरदान दिया। इसके पश्चात राक्षसों ने ऋषियों के यज्ञ को विध्वंश करना करना शुरू कर दिया। ऋषि मुनियों पर अत्याचार होता देख श्रद्धालु द्रवित हो जा रहे थे। ऋषि मुनियों के खून को घड़े में लेकर असुर जब रावण के दरबार में पहुंचते हैं तो आकाशवाणी होती है हे रावण यही रक्त से भरा घड़ा तुम्हारे कुल के विनाश का कारण बनेगा। जिसे सुनकर रावण घबरा गया। तत्काल आदेश दिया कि इस घड़े को सीमा से बाहर जनकपुर में गाड़ दिया जाए। समय बीतने के उपरांत जनकपुर में अकाल पड़ गया। अकाल पड़ते ही चारो ओर हाहाकार मच गया। करुण क्रदन सुन लोगों की आंखें छलक पड़ी। ऋषियों के आदेश पर राजा जनक हल चला रहे थे कि हल का फाल घड़े से टकरा गया। घड़े में बच्चे के रोने की आवाज सुनायी दी। घड़े से कन्या की उत्पत्ति हुई। वहीं दूसरी तरफ अयोध्या में राजा दशरथ के यहां राम, भरत, लक्ष्मण, शत्रुघभन का जन्म होता है। अयोध्यावासी उत्सव मनाते हैं। भगवान राम के जन्म लेते ही पूरा पंडाल जयकारे से गूंज उठा।

भरत का सजल प्रेम देख श्रद्धालु भाव विह्वल
अमर उजाला ब्यूरो
मऊ। श्रीरामलीला मेला समिति के तत्वावधान में नगर में चल रही रामलीला में गुरुवार को बाबा बिहारी दास के मंदिर से चित्रकूट तक भरत सहित अयोध्यावासियों का रामचंद्र जी से मिलने के लिए जुलूस प्रस्थान, लक्ष्मण रोष, रामलक्ष्मण संवाद सहित विभिन्न लीलाओं का मंचन किया गया। राम-भरत प्रेम देखकर श्रद्धालु भाव विह्वल हो गए।
रामलीला में अयोध्यावासियों के साथ भरत, शत्रुघ्न जुलूस के रूप में गुरु वशिष्ठ के नेतृत्व में चित्रकूट के लिए प्रस्थान करते हैं। जुलूस जब श्रृंगेश्वरपुर के समीप पहुंचता है। भरत के आने की खबर जब निषादराज को मिलती है तो निषादराज दुखी मन से विचार करता है कि भरत के मन में कपट भाव है। इसलिए अपने जाति वालों से जुलूस को नदी तट पार न करने देने के लिए सावधान करता है। साथ ही भरत से लड़ाई करने के लिए निर्देश देता है। बुजुर्ग व्यक्तियों की सलाह पर भरत से मिलने के लिए जाता है। वहां भरत प्रेम देखकर मंत्रमुग्ध हो जाता है। भरत प्रेम देखकर लोग कुछ देर के लिए सोचने के लिए विवश हो जा रहे थे। जुलूस सहित भरत प्रयागराज पहुंचते हैं। यहीं उनकी भरद्वाज मुनि से मुलाकात होती है। भरद्वाज मुनि जुलूस का आतिथ्य सत्कार कर चित्रकूट का मार्ग बताते हैं। भरत के आने की खबर पाकर लक्ष्मण आक्रोशित हो जाते हैं। चित्रकूटवासी भयभीत हो जाते हैं, तभी आकाशवाणी होती है कि हे तात लक्ष्मण कोई भी काम हो उसे समझ बूझकर किया जाए। आकाशवाणी सुनकर लक्ष्मण सकुचा गए। राम ने लक्ष्मण को समझाते हुए कहा कि हे भाई सत्य कह रहे हो राज्य का मद सबसे कठिन मद है। भरत सरीखा पुरुष ब्रह्मा की सृष्टि में न तो देखा गया है और न ही सुना गया है। चित्रकूट के राम कुटी के समीप भरत और अयोध्यावासियों ने नदी में स्नान किया। सभी लोगों को नदी के समीप ठहराकर माता, मंत्री और गुरु की आज्ञा पाकर निषादराज और शत्रुघ्न को साथ लेकर भगवान राम के पास पहुंचते हैं। वहां राम भरत का मिलन होता है। राम भरत प्रेम देखकर दर्शक भाव विह्वल हो गए।

श्रीरामलीला मेला समिति के तत्वावधान में नगर में चल रही रामलीला में आज
जयंत नेत्र बेधन, अत्रि अनुसूइया से भेंट, विराध राक्षस वध, सरभंग दाह, मुनियों से समागम

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