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आस्था का केंद्र बनी है औघड़ बाबा की कुटी

Mau Updated Fri, 12 Oct 2012 12:00 PM IST
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घोसी। कस्बा के सटे दक्षिण स्थित औघड़ बाबा की कुटी और औघड़ बाबा की समाधि लोगों के आस्था का केंद्र बना हुआ है। मान्यता है कि श्रद्धा पूर्वक पूजन अर्चन करने से मनोकामना पूरी हो जाती है। यहां मकर संक्रांति पर मेला लगता है तो पितृ पक्ष के अंतिम दिन सटे गयासुर पोखरा पर पिंडदान करने वालों की भीड़ रहती है। यहां झूठी कसम खाने से लोग डरते हैं।
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घोसी नगर से दक्षिण राष्ट्रीय राजमार्ग से सटे पूरब गयासुर पोखरे के पास जंगल में आजादी से पूर्व शिवदत्त दास नाम के औघड़ संत आकर धुनी रमा दिए। यहां चरवाहों द्वारा उनकी चर्चा आसपास में फैलने लगी। बुजुर्गों के अनुसार औघड़ बाबा का जिसने भी आशीर्वाद पा लिया उसकी हर मुराद पूरी हो गई। मझवारा मोड़ के दुकानदार बाट जोहते थे कि औघड़ बाबा आकर दुकान का सामान बांट देे कारण कि जिसकी दुकान में जाकर उसको डांटकर सामान लोगों में बांट देते थे उसका बक्सा रुपयों से भर जाता था। जंगल में रहने वाले सांप, बिच्छूओं को खा जाते थे। थोड़ी देर बाद उसे जिंदा निकाल देते थे। इनका स्वर्गवास संवत 2000 मेें हो गया। इनके शिष्य सुदामा दास और भक्तों ने कुटी के पास इनकी समाधि बनाई जो सबके श्रद्धा विश्वास का अगाध केंद्र है। औघड़ बाबा शिवदत्त की मृत्यु के बाद सुदामा दास ने गद्दी संभाली। इनकी मृत्यु के बाद इनकी भी समाधि गुरु के बगल में बनी। सुदामा दास के बाद इनके शिष्य सरजू दास ने गद्दी संभाली। इनकी भी कुटी के पास समाधि है। मिर्जाजमालपुर के सुभाष दास कुटी की देखभाल करते हैं। इनका निधन 2011 में हो गया। तबसे यहां कोई औघड़ बाबा नहीं आए। यहां प्रत्येक रविवार को हुजूम उमड़ता है।

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