दशकों बाद भी तमसा नदी को नहीं किया जा सका प्रदूषणमुक्त

Mau Updated Tue, 09 Oct 2012 12:00 PM IST
मऊ। आजादी के दशकों बाद भी तमसा नदी को प्रदूषणमुक्त नहीं किया सका है। नगर क्षेत्र का सैकड़ों टन कूड़ा प्रतिदिन नदी में गिरता है, लेकिन शासन प्रशासन की ओर से अभी तक नदी को प्रदूषणमुक्त करने की दिशा में ठोस योजना तक नहीं बनायी जा सकी है। तमसा मेें गिरने वाले गंदा नालों के पानी को फिल्टर करने के लिए यूआईडीएसएसएमटी की ओर से करोड़ों रुपये की लागत से वाटर ट्रीटमेंट प्लांट लगाने की योजना है। सीएनडीएस ने नगरपालिका प्रशासन को प्लांट लगाने के लिए सर्वे कराने का निर्देश दिया है।
पवित्र तमसा जिले के पश्चिमी छोर आजमगढ़ जनपद के बार्डर से लेकर बलिया जनपद के बार्डर तक घुमाव लेते हुए फैली हुई है। तमसा नदी मर्यादा पुरुषोत्तम राम से जुड़े होने के कारण हिंदू जनमानस में अत्यंत महत्व प्रदान किया गया है। इसी वजह से प्रमुख स्नान व धार्मिक पर्वो पर नगर के हनुमान घाट, मड़इयाघाट, बमघाट, सत्तीघाट, ढेकुलियाघाट सहित विभिन्न घाटों पर लोग नदी में स्नान कर पूजन अर्चन करते हैं। लेकिन नदी तट के पास मकानों के बन जाने से नदी में प्रदूषण तेजी से बढ़ रहा है। हालत मेें कूड़ा निस्तारण की योजना न होने से प्रतिदिन आठ सौ टन कूड़ा नदी में गिराया जाता है। यही नहीं नगर के दर्जनों नालों का गंदा पानी नदी मेें ही गिरता है। इससे लोग अब नदी में स्नान करने से भी कतराने लगे हैं। गर्मी के समय तो नदी नाले में तब्दील हो जाती है। नदियों को प्रदूषित होने से रोकने के लिए नदी में गिरने वाले नालों के गंदे पानी को फिल्टर करने के लिए यूआईडीएसएसएमटी की ओर से लगभग 50 करोड़ से की लागत से वाटर ट्रीटमेंट प्लांट लगाने की योजना है। सीएनडीएस ने नगरपालिका प्रशासन को सर्वे कराने का निर्देश दिया है। पर्यावरणविदों की मानें तो शासन प्रशासन का यही रवैया रहा तो जीवनदायिनी तमसा विलुप्त हो सकती है।

नहीं आगे आ रही स्वयंसेवी संस्थाएं
मऊ। तमसा नदी दिन ब दिन प्रदूषण बढ़ने से पर्यावरणविद ही नहीं आमजनमानस चिंतित है। जनपद में दर्जनों स्वयंसेवी संस्थाएं पंजीकृत हैं। लेकिन किसी ने नदी को प्रदूषण से बचाने के लिए जागरूकता अभियान तक नहीं चलाया। यदि किसी ने चलाया तो केवल प्रतीकात्मक आंदोलन ही किया।

नहीं चल रहा जागरूकता अभियान
मऊ। तमसा नदी को साफ सुथरा रखने की जिम्मेदारी सभी लोगों की है। लेकिन अभी तक शासन प्रशासन की ओर से जागरुकता अभियान चलाकर लोगों को जागरूक करने की जहमत तक नहीं उठायी जा सकी है।

क्या कहते हैं अधिकारी
अपर जिलाधिकारी पीपी सिंह का कहना है कि नदियों को साफ सुथरा रखना प्रशासन ही नहीं सभी लोगों की नैतिक जिम्मेदारी है। धारा 133 के तहत नदियों में कचरा डालने तथा अतिक्रमण करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। नदी को प्रदूषणमुक्त कराने के लिए वाटर ट्रीटमेंट प्लांट लगाने के लिए शासन को पत्र लिखा जाएगा।

नगरपालिका के अधिशासी अधिकारी विद्या सागर का कहना है कि तमसा मेें गिरने वाले गंदा नालों के पानी को फिल्टर करने के लिए यूआईडीएसएसएमटी की ओर से 50 करोड़ की लागत से वाटर ट्रीटमेंट प्लांट लगाने की योजना है। सर्वे का कार्य शुरू कर दिया गया है।

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