पुत्र की दीर्घायु को माताओं ने रखा निर्जला व्रत

Mau Updated Tue, 09 Oct 2012 12:00 PM IST
मऊ। नगर सहित जिले के विभिन्न ग्रामीण अंचलों में जीवित्पुत्रिका व्रत का पर्व बड़े ही श्रद्धापूर्वक वातावरण में मनाया गया। महिलाओं ने निर्जला व्रत रख और देर शाम नदी, तालाब में स्नान करने के बाद दीप और वस्त्र दान किया। शहर के ब्रह्मस्थान और तमसा नदी के किनारे महिलाओं की भारी भीड़ रही, जहां उन्होंने अपने पुत्रों के दीर्घायु की कामना करते हुए कल्याणकारी कहानियां सुनीं। नदी तट पर मेला जैसा दृश्य रहा।
नगर के मठिया टोला, हरिकेशपुरा, सहादतपुरा, निजामुद्दीनपुरा, पावरहाउस कालोनी, भीटी आदि मुहल्लों की महिलाएं गीत गाते हुए मड़इया घाट और तमसा नदी तट पर पहुंची। इसके अलावा विभिन्न सार्वजनिक स्थलों पर एकत्र होकर गौरी गणेश की पूजा की। उधर बाजारों में चढ़ावे के लिए फलों की खरीददारी में तेजी देखी गई। महिलाओं ने फलों और मिठाइयों की खरीददारी कर विधि विधान से पूजन अर्चन किया। निराजल व्रती महिलाओं ने अपने पुत्रों के दीर्घायु की कामना की। धार्मिक लोक कथाएं सुनकर धर्म की महत्ता को स्थापित करने का प्रयास किया। पूजा स्थलों पर निराजल व्रती महिलाओं के भीड़ के साथ कथा सुनने वालों की भारी भीड़ रही।
इस पर्व के मनाने के पीछे अभिज्ञान शाकुंतलम में ‘पुत्र पिंड परिपालनों नाम उपवास’ का उल्लेख है। इसमें यह दर्शाया गया है कि जीवित्पुत्रिका का व्रत देवी गौरी का व्रत है। इसमें शिवा की पूजन का विधान है। देहाती तथा लोक ख्याति में शिवा को सियामाई कहा जाता है। इस व्रत में जीमूत वाहन की पूजा का भी प्रावधान है। कथा सरित सागर के अनुसार जीमूत केतु राजा के पुत्र थे। जीमूत धर्मनिष्ट राजकुमार थे। जब उनके राज्य पर उनके रिश्तेदारों ने आक्रमण किया तो जीमूत ने अपने पिता से कहा कि युद्ध करना घृणित कार्य है। इसलिए राजपाट छोड़कर सन्यास ले लीजिए तब जीमूत वाहन पर्वत पर विहार करने चले गए। वहां उन्होंने एक रोती हुई सपिर्णी स्त्री से पूछा कि उसके विलाप करने का क्या कारण है। उस सर्पिणी ने बताया कि आज उसके पुत्र को गरुण के भोजन बनने की बारी है। इसीलिए पुत्र के शोक में दुखी हूं। जीमूत स्वयं सर्पिणी के पुत्र के रूप में गरुण के समक्ष प्रकट हुए। गरुण ने खाना खाने से पहले ही स्थिति का आकलन कर लिया और सर्र्पों को न खाने का संकल्प कर लिया। गरुण ने जीमूत वाहन के इस त्याग से प्रसन्न होकर वरदान दिया था। इसी कारण जीमूत वाहन की पूजा की जाती है।
सुल्तानपुर संवाददाता के अनुसार, क्षेत्र के विभिन्न इलाकों में जीवित्पुत्रिका व्रत का पर्व हर्षोल्लासपूर्वक मनाया गया। तालाबों के तट पर व्रती महिलाओं ने कहानियां सुनी। साथ ही विधि विधान से पूजन अर्चन कर अपने पुत्रों के लंबी आयु की कामना किया।
करहां संवाददाता के अनुसार, क्षेत्र केविभिन्न इलाके की व्रती महिलाओं ने गुरादरी धाम स्थित पवित्र पोखरे पर इकट्ठा होकर अपने पुत्रों के दीर्घायु के लिए विधि विधान से पूजन अर्चन किया। साथ ही कथा सुनी। इस अवसर पर महिलाओं की भारी भीड़ रही। सतीश

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