मुख्यमंत्री जी! कब मिलेगी गांव के अस्पतालों में सुविधाएं

Mau Updated Tue, 09 Oct 2012 12:00 PM IST
मधुबन। नई सरकार बने छह माह से अधिक हुआ लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में स्थापित सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सुविधाएं बहाल होती नजर नहीं आ रही है। फतहपुर मंडाव ब्लाक की सीएचसी तथा नया प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सुविधाओं के अभाव में मरीजों को मुंह चिढ़ा रहे हैं। यहां दवाओं का टोटा है। विशेषज्ञ चिकित्सकों का पद लंबे समय से रिक्त चल रहा है। इमरजेंसी मरीजों का इलाज करने के बजाय जिला अस्पताल रेफर किया जाता है। प्रबुद्ध वर्ग के लोग आजमगढ़ पहुंचकर मुख्यमंत्री से मिलने का मन बनाए हैं।
फतहपुर मंडाव ब्लाक की आबादी लगभग दो लाख से अधिक है। दो वर्ष पूर्व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को उच्चीकृत कर करोड़ों की लागत से सीएचसी का निर्माण कराया गया। लेकिन अभी तक विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती नहीं की जा सकी है। मात्र दो चिकित्सकों के भरोसे अस्पताल का संचालन होता है। हालत यह है कि एक्सरे, अल्ट्रासाउंड तक की व्यवस्था नहीं है। सीएचसी पर सुविधाओं का अभाव रहने से यहां नाम मात्र मरीज आते हैं। मरीजों की मानें तो अस्पताल में दवाओं का टोटा है। लगभग एक सप्ताह से अस्पताल में ग्लूकोज का बोतल तक नहीं है। न्यू पीएचसी मधुबन को छोड़ दिया जाए तो दुबारी, नेमडाड़, तिघरा और दुबारी पर तैनात चिकित्सक अधिकांशत: राष्ट्रीय कार्यक्रमों में दर्शन देकर चले जाते हैं। अब तो नए फैशन मेें एक छुट्टी की एप्लीकेशन पड़ी रहती है। मरीजों के अनुसार दुबारी न्यू पीएचसी पर तैनात चिकित्सक डेढ़ माह से गायब हैं। इसी तरह ज्यादातर मातृ शिशु कल्याण केंद्रों पर ताला ही लटका रहता है।

सिर्फ हाजिरी लगाने आते हैं वो भी रात में
मधुबन। फतहपुर मंडाव ब्लाक मुख्यालय स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में तैनात एक विशेषज्ञ चिकित्सक देवरिया जनपद में प्रैक्टिस करते हैं। रात में कभी कभार आकर हाजिरी लगाकर चले जाते हैं। ऐसे में महकमे की ओर से मरीजों की सुधि ही नहीं ली जा सकी है।

आवासों के आवंटन में मनमानी
मधुबन। फतहपुर मंडाव ब्लाक मुख्यालय स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र परिसर में स्थित चिकित्सकों तथा स्वास्थ्यकर्मियों के आवासों में आवंटन में भी मनमानी की गई है। अस्पताल के कर्मचारियों को छोड़ निजी लोगों को भी आवंटन कर दिया गया है।


सुविधाएं बहाल न होने से उबाल
मधुबन। फतहपुर मंडाव में स्वास्थ्य सुविधाएं बहाल न होने से लोगों का आक्रोश बढ़ता जा रहा है। न्याज अहमद, मोहम्मद अतहर, रामनारायन यादव, अली मुर्तुजा ने कहा कि करोड़ों की लागत से अस्पताल का भवन बनने के वर्षों बाद भी विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती तक नहीं की जा सकी है। दवाओं का हमेशा अकाल रहता है। चिकित्सकों तथा स्वास्थ्यकर्मियों की अनियमित दिनचर्या से मरीजों का इलाज नहीं हो पा रहा है। उन्होंने सुविधाओं को बहाल करने के लिए आजमगढ़ जाकर मुख्यमंत्री को ज्ञापन साैंपा जाएगा।

उपजिलाधिकारी मधुबन रामप्रसाद का कहना था कि सरकारी अस्पतालों मेें व्याप्त दुर्व्यवस्था के संबंध में रिपोर्ट जिलाधिकारी को भेजी गई है।

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