तमसा बचाओ अभियानः प्रतिदिन गिर रहे कचरे से पानी हो रहा काला

Mau Updated Mon, 08 Oct 2012 12:00 PM IST
मऊ। तमसा का संसार भले ही छोटा है पर हिंदू धर्मगंथों में गंगा से कम नहीं है। गंगा निर्मलीकरण को लेकर केंद्र से लेकर राज्य सरकार की तरफ से तमाम कवायदें की जाती रही हैं लेकिन जिले में बह रही तमसा (टौंस) में हजारों लीटर जहरीला गंदा पानी छोड़े जाने से विषैला हो रही है। इसके सफाई के लिए आज तक न किसी साधु-संत ने अनशन किया न तो अधिकारियों की ओर से कोई कारगर पहल हुई। प्रशासन की ओर से कोई कार्ययोजना न होने से इसका आंचल नित मैला होता जा रहा है।
पवित्र तमसा जिले के पश्चिमी छोर आजमगढ़ जनपद की सीमा से लेकर बलिया जनपद की सीमा तक घुमाव लेते फैली हुई है। इसे टौंस के नाम से भी जाना जाता है। जनपद में तमसा नदी के प्रति उदासीनता इस कदर है कि हर जगह न सिर्फ इसका दोहन किया जा रहा है। बल्कि इसे सीवर के सहायक के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। मुहम्मदाबाद गोहना से लेकर नगर क्षेत्र ही नहीं बल्कि अन्य जनपदों आजमगढ़, बलिया आदि स्थानों पर भी लगभग एक जैसा हाल है। नदी में गंदे नालों का पानी अनजाने में नहीं बल्कि जानबूझ कर गिराया जाता है। राम के वनवास की साक्षी तमसा आज अपने अस्तित्व से जंग लड़ रही है। इसकी पौराणिक कथाएं तो कई प्रसिद्ध है लेकिन इसकी विशिष्टता एवं प्राचीनता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि तुलसीदास ने खुद अयोध्या कांड में इसका जिक्र किया है। वाल्मीकि की रामायण में भी इस तमसा का जिक्र है। इससे ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि इसकी प्राचीनता भगवान राम के पहले से है लेकिन फिर भी किसी ने इसके अस्तित्व को बचाने की कोशिश नहीं की। अब तो इस पर इस कदर संकट मंडराने लगा है कि इसके बचाव के उपाय नहीं किए गए तो इसका कल कल करता अविरल पानी जहर बन जाएगा। कई स्थानों पर इसका पानी काला हो चुका है। इसका पानी आचमन के लिए तो दूर पशु पक्षी भी पीने से कतराने लगे हैं। कहीं कहीं सिंचाई के लिए इसका प्रयोग जरूर सार्थकता के रूप में होता है लेकिन वहां भी इसके अस्तित्व की रक्षा के लिए कोई ठोस उपाय नहीं किए गए हैं।

नगर का 800 मीट्रिक टन गिरता है कूड़ा
मऊ। नगर में प्रतिदिन लगभग 800 मीट्रिक टन कूड़ा पैदा होता है। अभी तक कूड़ा निस्तारण की कोई योजना न होने के चलते यह कूड़ा तमसा के तट पर ही गिराया जाता है। इसी कूड़ों के ढेर पर इमारतें भी खड़ी हो रही हैं। और तो और स्लाटर हाउस का मलमूत्र का ठिकाना भी तमसा का ही तट है।

कूड़ा निस्तारण की बनेगी योजना
मऊ। जिले में तमसा के मैली होने एवं कूड़ा कचरा फेंके जाने के बारे में पूछे जाने के बारे में अपर जिलाधिकारी पीपी सिंह कहते हैं जल्द ही नगर के कूड़े कचरे के निस्तारण की बड़ी कार्ययोजना तैयार कर तमसा में इस प्रकार की गंदगी रोके जाने के प्रयास किए जाएंगे।

औपचारिकता और दिखावे से नहीं चलेगा काम
फोटो प्रतिक्रिया
मऊ। तमसा में हो रहे प्रदूषण के प्रति शासन प्रशासन की कोई विस्तृत कार्ययोजना न होने के चलते लोग चिंतित तो हैं लेकिन इसे बचाने के लिए कौन आगे आएगा इसे लेकर पहले आप पहले आप की मुद्रा में हैं। कभी कभार कुछ संगठन या व्यापारी आगे भी आते हैं वह भी सिर्फ दिखावे या औपचारिकता तक ही सिमट के रह जाते हैं।
डा. ओपी सिंह और जीशान अहमद सिद्दीकी कहते हैं कि तमसा का जल गंगा जमुना तहजीब को दर्शाता है। हिंदू जहां इसमें नहाकर पूजा पाठ करते हैं और आचमन करते हैं तो मुस्लिम भी अधिकांश जगहों पर उजू कर मस्जिदों में जाकर नमाज पढ़ते हैं। इसे बचाया जाना आवश्यक है। डा. रमेश लाल श्रीवास्तव और डा. रामगोपाल गुप्ता का कहना है कि तमसा को बचाया जाना उतना ही जरूरी है जितना की गंगा का। कहा कि पौराणिक महत्व की नदियों को नहीं बचाया गया तो न सिर्फ इनका अस्तित्व संकट में पड़ेगा बल्कि मनुष्य जाति भी एक दिन विषाक्त जल पीने को विवश होगा।

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