एड्स से मौतों पर नहीं हो रहा नियंत्रण

Mau Updated Mon, 08 Oct 2012 12:00 PM IST
मऊ। इसे जन जागरूकता की कमी कहें या विभागीय उदासीनता। लेकिन जिले में एड्स का वायरस तेजी से फैल रहा है। आंकड़ों के मुताबिक दो साल में चौदह मौतें हो चुकी हैं। जबकि एक साल में 300 से अधिक चिह्नित किए गए हैं। इसके चलते मऊ यूपी के ग्रेड वन में पहुंच चुका है। लेकिन सवाल यह उठता है जिला प्रशासन ने चिह्नित रोगियों के लिए अब तक क्या किया।
एचआईवी से पीडि़त एड्स मरीजों की एक के बाद एक मौत ने वाकई सारी व्यवस्था को चौका कर रख दिया। इसकी बढ़ती संख्या को लेकर चलाए जा रहे सरकारी और गैर सरकारी कार्यक्रमों पर सवाल भले उठे या न उठे लेकिन सार्थकता कमजोर जरूर मालूम पड़ती है। आखिर हो भी क्यों न प्रति वर्ष करोड़ों खर्च करने के बाद भी संख्या में स्थिरता के बजाए 25 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की जा रही है। जबकि जिले में सरकारी कार्यक्रमों के अलावा चार एनजीओ और अन्य सोसाइटियों द्वारा भी जागरूकता कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। एड्स के प्रति जनजागरूकता को लेकर दोष भले ही किसी को दिया जाए लेकिन अभी भी गांवों में इसके बारे में पढ़े लिखे लोगों के अलावा अनपढ़ एवं कम पढ़े लिखे लोग जानते तक नहीं हैं। एनजीओ का भी कार्यक्रम सिर्फ उन्हीं मरीजों के इर्दगिर्द घूम कर रह जाता है जो इसके चपेट में आने के बाद इलाज करवाते हैं या जांच में जिनका एचआईवी पाजिटिव निकलता है। यही कारण है कि मऊ जनपद धीरे धीरे एड्स के मामले में ग्रेड वन में पहुंच चुका है। इनमें इटावा, रायबरेली सहित पांच जिले शामिल हैं। पिछले कुछ वर्षों में जिले में एड्स से 14 मौत भी हो चुकी है। जिले में इस समय एचआईवी पीडि़तों की संख्या 1057 हैं इनमें 79 बच्चे भी शामिल हैं। इस संबंध में मुख्य चिकित्साधिकारी डा. नंदलाल यादव कहते हैं कि एचआईवी के प्रति आम आदमी के जागरूक हुए बिना इस पर नियंत्रण नहीं हो सकता है। बताया कि यह बीमारी महानगरों से युवा मुफ्त में ला रहे हैं। इसके प्रति सभी को जागरूक करने के उद्देश्य से ही रेड रिबन एक्सप्रेस का कार्यक्रम लगाया गया है।


दो वर्ष पूर्व रेड रिबन के आने के बाद भी नहीं जागे
मऊ। एड्स के प्रति लोगों में जन जागरूकता लाने के लिए दो वर्ष पूर्व रेड रिबन एक्सप्रेस आई थी। इसे लेकर जनपद के हजारों लोगों ने इसका अवलोकन कर विभिन्न जानकारियां ली थी बावजूद इसके लोग नहीं जाग पाए। उस समय जिले में एड्स पीडि़तों की संख्या लगभग पांच सौ के आंकड़े को भी नहीं छू पाई थी लेकिन दो साल बाद 1057 तक जा पहुंची।

क्या है एड्स एवं एचआईवी
आमतौर पर लोग एचआईवी एवं एड्स को एक ही मान के चलते हैं। हालांकि दोनों का संबंध एक ही से है। लेकिन जिन मरीजों की जांच में सीडी काउंट की संख्या 200 से कम पाई जाती है। वह एड्स कहलाती है। जबकि इससे अधिक संख्या रहने पर मरीज को एचआईवी पाजीटिव माना जाता है। चिकित्सक डा. एके रंजन कहते हैं कि एचआईवी के मरीज दवा के बल पर अपनी सामान्य जिंदगी काफी लंबे अरसे तक जी सकते हैं। बताया कि यह बीमारी किसी को छूने, साथ उठने, बैठने एवं साथ खाने पीने से नहीं फैलती हैं। इसके बचाव के सुरक्षित यौन संबंध, नए सिरिंज का प्रयोग किया जाना चाहिए।

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