उज्जमा-नगमा ने उपहास को बना ली जिंदगी

Mau Updated Mon, 01 Oct 2012 12:00 PM IST
अशोक श्रीवास्तव
घोसी। ‘मन में हौसला हो तो तमाम बाधाओं के बावजूद राहें आसान हो जाती है’ इसे सच साबित किया है घोसी नगर के मदापुर निवासी बुनकर मजीदुल्लाह अंसारी की तीन बेटियाें ने। लोगों के ताने का फिक्र छोड़ बौनी कद की उज्जमा खातून बीए अंतिम वर्ष की छात्रा है। वहीं नगमा मदरसे से मौलवी (स्नातक) की डिग्री हासिल करने के बाद आधुनिक शिक्षा के लिए इंटर में पढ़ रही है जबकि रेशमा सातवीं में पढ़ रही है। माता पिता को लड़कियों के भविष्य को लेकर चिंता सता रही है।
घोसी नगर के मदापुर सम्सपुर वार्ड नंबर 12 निवासी मजीदुल्लाह तथा इनकी पत्नी फातिमा भी सामान्य लंबाई के हैं। परंतु इनकी सभी संतानों की लंबाई काफी कम है। बड़ी पुत्री 20 वर्षीय पुत्री नगमा की लंबाई मात्र तीन फीट छह इंच है। दूसरी पुत्री 18 वर्षीय उज्जमा खातून की तीन फुट चार इंच है। जबकि 15 वर्षीय रेशमा की लंबाई तीन फीट से भी कम है। गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने के बाद भी मजीदुल्लाह ने बच्चों की हौसला आफजाई किया। बड़ी पुत्री नगमा ने कद छोटा होने और लोगों के उपहास के बाद भी इसे खुदा की नेमत मानते हुए मदरसा मरकजी दारुल उलूम से मौलवी की दीनी शिक्षा लेने के बाद पूर्वांचल बालिका इंटर कालेज नदवासराय में ग्यारहवीं में पढ़ रही है। साथ ही सिलाई-कढ़ाई सहित अन्य विधाओं में पारंगत है। दूसरी पुत्री उज्मा ने शारीरिक कमजोरी को चुनौती मानते हुए हाईस्कूल और इंटर विज्ञान वर्ग प्रथम श्रेणी से पास करने के बाद सर्वोदय डिग्री कालेज में बीए अंतिम वर्ष की छात्रा है। इसके अलावा कढ़ाई में भी पारंगत है। परिवार के लोगों के कपड़े उज्जमा और नगमा ही सिलती है।

उज्जमा और नगमा ने पेश किया नजीर
घोसी। समाज तथा सहपाठियों के उपहास झेलने के बाद भी उज्जमा तथा नगमा ने अपने मिशन की ओर से बढ़कर एक नजीर पेश की है। उज्जमा ने बताया कि कक्षा में सहपाठी चिढ़ाते हैं, लेकिन उच्च शिक्षा हासिल कर प्रशासनिक अधिकारी बनकर देश सेवा करना एकमात्र उद्देश्य है। वहीं नगमा का कहना था कि दीनी शिक्षा लेने के बाद आधुनिक शिक्षा लेकर समाज को शिक्षा देना उद्देश्य है।

पिता को अपने बच्चियों पर नाज
घोसी। घोसी ब्लाक के मदापुर सम्सपुर निवासी मजीदुल्लाह बच्चों के भविष्य को लेकर चिंतित है। उन्होंने बताया कि मेरे परिवार में पिता भाई सभी सामान्य लंबाई के हैं। लेकिन मेरे बच्चों की लंबाई काफी कम हो गई है। बीएचयू सहित अन्य जगहों पर दिखाया लेकिन इलाज महंगा होने के कारण पत्नी की कमी दूर नहीं हुई। बच्चों की पढ़ाई में कोई कोर कसर नहीं रहेगा। शुरू मेें पड़ोस तथा अन्य ने पढ़ाने से मना किया परंतु मेरे दोनों लड़कियों के लगन तथा पड़ोस के बच्चों से पढ़ाई में अच्छे होने से सभी खामोश हो गए।

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