अवैध बालू खनन पर कैसे लगेगी लगाम

Mau Updated Fri, 28 Sep 2012 12:00 PM IST
मऊ। अवैध बालू खनन पर रोक लगाने के लिए प्रदेश में ई-टेंडरिंग प्रणाली को हरी झंडी देने का निर्देश तो दिया लेकिन यह भी मामला हाईकोर्ट में जाने से हाल फिलहाल ठंडा हो गया। ई टेंडरिंग पर भी अगली सुनाई तक स्थगन आदेश हो गया है। ऐसे में अवैध बालू खनन पर कैसे रोक लगेगी यह अभी भी यक्ष प्रशभन बना है। जिले में लंबे अर्से से बालू खनन माफिया सक्रिय हैं। इनकी दबंगई और विभागीय मिलीभगत से बालू का अवैध खनन होता है। पट्टा और टेंडरिंग व्यवस्था न होने से जहां राजस्व को चूना लग रहा है वहीं नदियों का दोहन भी हो रहा है।
जिले में बालू खनन का पट्टा या ठेका पिछले कई वर्षों से बंद हैं। पट्टे का मामला भी न्यायालय में लंबित है। इधर प्रदेश सरकार ने पट्टे की जगह ई टेंडरिंग प्रणाली के तहत ठेका देने का निर्णय लिया था। इसके तहत 24 सितंबर तक आवेदन करने की अंतिम तिथि निर्धारित की गई थी। दर्जनों फार्म ई-टेंडरिंग प्रणाली से जमा भी थे। लेकिन इस बीच हाईकोर्ट ने रोक लगा दिया है और अगली सुनवाई तक ई-टेंडरिंग प्रक्रिया पर भी रोक लगाया है। वर्षों से बंद बालू खनन पर रोक के चलते जहां राजस्व को क्षति हो रही है वहीं अवैध बालू खनन माफिया भी सक्रिय हैं। नदी बढ़ने के साथ तो हालांकि इसमें कुछ कमी आई है लेकिन नदी का जलस्तर कम होने के बाद जिले के कई लाट क्षेत्रों में इनका कब्जा हो जाता है।

सफेद बालू में खनन से होती है मोटी कमाई
मऊ। जिले में सफेद सोना यानी बालू यहां की तमसा और घाघरा नदियों से निकलता है। यहां खनन का अवैध कारोबार वर्षों से संचालित है। पूर्व में पट्टा प्रणाली में राजस्व जमा करने के बाद भी बालू खनन से पट्टेदार एवं उसके समर्थक मालामाल हो जाते थे। यही कारण है कि इस सफेद सोने को लेकर यहां वर्चस्व की जंग चलती रहती है। पानी का जलस्तर बढ़ने के बाद भी छोटे पैमाने पर ही सही अवैध खनन जारी है।
जिले में सफेद बालू का प्रमुख केंद्र घाघरा और तमसा नदी है। जिले में इसके लिए छह लाट बनाए गए हैं जहां से सफेद बालू निकलता है। लाट नंबर एक तमसा नदी के भीटी पूरब से 100 एकड़ में फैला हुआ है। यह क्षेत्र नगर में ही आता है। नदी किनारे के वांशिदे अवैध बालू खनन का नजारा यहां हमेशा देखते रहते हैं। मल्लाह वर्ग से जुटे लोग भी अपनी रोजी रोटी के लिए पट्टे पर रोक के बावजूद कड़ी मेहनत कर बालू निकालते हैं। जब कि इस पर वर्षों से रोक है। लाट नंबर दो बभनीकोल से रणवीरपुर में भी 100 एकड़ में फैला है। यहां भी बालू खनन को लेकर वर्चस्व की जंग में कई हत्याएं हो चुकी है। इसमें भीटी और रणवीरपुर बालू खनन का काफी प्रसिद्ध इलाका है। बहादुरगंज मऊ सीमा पर स्थित सिउराघाट, वजीरपट्टी घाट आदि स्थान अवैध बालू खनने के लिए काफी लंबे अर्से से प्रसिद्ध है। लाट नंबर तीन रतनपुरा से पिपरसाथ ढैंचा तक है। भीटी पुल से पश्चिम भदेसरा तक भी 60 एकड़ का लाट है। इसे लाट नंबर चार से जाना जाता है। यहां भी अवैध बालू खनन होता है। लाट नंबर पांच भदेसरा से सहरोज होते हुए बख्तावरगंज तक फैला हुआ है। यह भी 60 एकड़ तक फैला हुआ है। लाट नंबर छह घाघरा का कम्पेक्ट क्षेत्र है जो रसूलपुर से परसिया जयरामगीरी तक है।

दोहरीघाट में बालू खनन पर लग गया था प्रतिबंध
मऊ। पूर्व में जब पट्टा व्यवस्था थी तो दोहरीघाट में बालू खनन होता था। इससे लाखों की राजस्व प्राप्ति होती थी। लेकिन कटान एवं दोहरीघाट के अस्तित्व को देखते हुए इस क्षेत्र में बालू खनन पर प्रतिबंध लगा दिया गया।

रक्त रंजित हो चुका है सफेद बालू का काला धंधा
मऊ। जिले में बालू खनन को लेकर वर्चस्व की जंग चलती है। जिले में इसे लेकर चार हत्याएं भी हो चुकी है। इस धंधे पर अपना प्रभाव बनाने के लिए यहां रह रहकर कोई न कोई खनन माफिया सिर उठाता रहता है। सफेद बालू में मोटी कमाई को लेकर माफिया ज्यादा सक्रिय रहते हैं। वहीं अवैध खनन भी यहां के कमाई का प्रमुख जरिया है। अवैध बालू कमाई को लेकर यहां कई हत्याएं हो चुकी है। बावजूद इसके अभी तक इसमें कोई पारदर्शी व्यवस्था नहीं लागू हो सकी है।

क्या कहते हैं अधिकारी
अपर जिलाधिकारी पीपी सिंह का कहना है जिले में बालू खनन प्रतिबंधित है। ई टेण्डरिंग प्रणाली पर भी न्यायालय के निर्देश पर अग्रिम आदेश तक रोक लगा दी गई है। बताया कि नदी का जलस्तर वैसे भी बढ़ा है बावजूद इसके यदि कहीं अवैध बालू खनन की शिकायत पाई गई तो उसके विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

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