जूते-चप्पलों पर पुलिस फेंक देती है रोटियां

Mau Updated Fri, 07 Sep 2012 12:00 PM IST
मऊ। हमारे देश में अन्न को कहा गया है ‘अनं वै ब्रह्म’। जिसे नमन करके ही ग्रहण किया जाता हैं। लेकिन अंग्रेजों के जमाने की पुलिस शहर कोतवाली की हवालात में बंदियों को भोजन के लिए दी जाने वाली रोटियां बचने के बाद जूते-चप्पलों पर फेेंक देती है। अन्न के ऐसे अपमान को देख लोगों के रोंगटे खड़े हो जाते हैं। लाकअप मुआयना से लेकर पहरे पर तैनात संतरी, हेड मुहर्रिर और खुद कोतवाल तक इससे अनजान बने रहते हैं। यह हालात इतना दर्शाने के लिए काफी है कि पुलिस की मानसिकता और कार्यप्रणाली आज भी भारतीय परिवेश के अनुरूप तारतम्य नहीं बैठा पाई है।
हवालात में बंदियों को भोजन देने के लिए चिक खुराक की व्यवस्था होती है। इसके तहत बंदियों को बिना भोजन कराए नहीं रहने दिया जाता है। इसके लिए बकायदे फालोवर तैनात होता है। संतरी और हेड मुहर्रिर लाकअप खोलकर बंदियों को भोजन कराते हैं। लेकिन शहर कोतवाली में बंदियों को भोजन दिए जाने को देख कर आम आदमी के रोंगटे खड़े हो जाते हैं। हवालात में भोजन के बाद बची हुई रोटियों को लाकअप के पास ही जूते और चप्पल पर फेंक दिया जाता है। जिसे देश में लोग भूख मिटाने के लिए बहुतायत मात्रा में भीख मांगते हैं वहां अन्न का यह अपमान समझ नहीं आता है। जबकि वेदों में भोजन को ‘अनं वै ब्रह्म’ की संज्ञा दी गई है। अन्न का तिरस्कार करने वाले को चांडाल तक कहा गया है। नियम के मुताबिक रोजाना लाकअप प्रभारी मुआयना भी करते हैं। जिसमेें बंदियों की स्थिति से अवगत होते हैं। लेकिन गुरुवार को हवालात के बाहर जूते और चप्पलों पर पड़ी इन रोटियों से महकमा पूरी तरह से अंजान बना रहा। इस बाबत नगर क्षेत्राधिकारी त्रिभुवन सिंह और प्रभारी कोतवाली मोहनलाल वर्मा का कहना है कि कोई बंदी भोजन करने के बाद फेंक दिया होगा। हालांकि ऐसी कोई जानकारी उन्हें नहीं है।

क्या कहते हैं अधिकारी
अपर पुलिस अधीक्षक विक्रमादित्य सचान का कहना है कि अन्न का अपमान किसी भी हालत में उचित नहीं हैं। अगर इस तरह की कोई बात है तो घोर लापरवाही है। मामले को संज्ञान में लेकर कार्रवाई की जाएगी।

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