उपजाऊ भूमि लीलने को आतुर है घाघरा

Mau Updated Wed, 05 Sep 2012 12:00 PM IST
दोहरीघाट (सं.)। घाघरा के लगातार घटने के बाद भी कटान थमने का नाम नहीं ले रहा है। हर रोज नदी उपजाऊ भूमि को लील रही है। इससे तटवर्ती इलाकों सहित कस्बे के धार्मिक धरोहरों के अस्तित्व खतरे में पड़ गया है। इसके बाद भी प्रशासन मौन है।
घाघरा सरहरा, धनौली रामपुर स्थित पावर ग्रिड के पास, नौली, चिऊटीडांड़, रसूलपुर, आश्रम सहित विभिन्न स्थानों पर कटान जारी रहने से लोगों की चिंता बढ़ती ही जा रही है। नदी के बार-बार घटते बढ़ने से लोगों को अनिष्ट होने का भय सता रहा है। कटानपीड़ितों के अनुसार नदी जब-जब बार-बार घटी बढ़ी है तभी तबाही भी हुई है। नदी के तटवर्ती इलाके के लोग कटान होने के भय से खेतों तक नहीं जा रहे हैं। अपनी विलीन हो रही उपजाऊ जमीन को दूर से ही लोग निहार रहे हैं। कटान जारी रहने से नगर की ऐतिहासिक धरोहरें मुक्तिधाम, दुर्गा मंदिर, शाही मस्जिद, लोक निर्माण विभाग का डाक बंगला और मुक्तिधाम पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। वहीं तटवर्ती इलाकों लामी, तारनपुर, कादीपुर, हरधौली, बहादुरपुर, बुढावर, पतनई, सरयां, ठिकरहिया, नगरीपार, रसूलपुर, सूरजपुर सहित दर्जनों गांवों के लोगों को कटान की चिंता खाए जा रही है। कटान पीड़ितों का कहना है कि कटान रोकने के उपाय अविलंब नहीं किया गया तो हम लोग चुप नहीं बैठेंगे।

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