बंदी विपुल की दूसरी जेल भेजने की संस्तुति

Mau Updated Sat, 01 Sep 2012 12:00 PM IST
मऊ। जिला कारागार के बंदी विपुल सिंह की दबंगई से कारागार और बैरकों में बंदी सहम गए हैं। मामले को गंभीरता से लेते हुए जेलर ने इसे गैर जनपद में स्थानांतरित करने के लिए डीएम को संस्तुति भेजी है। शुक्रवार को बैरकों की सघन तलाशी ली गई। इसमें हिदायत दी गई कि सुरक्षा नियमों के साथ खिलवाड़ करने वालों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
बंदियों की हरकत को लेकर जिला कारागार प्रशासन भी सख्ती बरतने लगा है। इसके लिए ऐसे बंदी जो कारागार में सुरक्षा के साथ खिलवाड़ करते हैं। बैरकों में बंद अन्य बंदियों को उकसाने का कार्य करते हैं, ऐसे बंदियों को चिह्नित किया जा रहा है। हत्या में निरुद्ध चल रहा बंदी विपुल सिंह द्वारा आए दिन मारपीट और माहौल के बिगड़ाने में दोषी मिलने पर जेलर रामजी ने गैर जिले केे कारागार में भेजने के लिए जिलाधिकारी को संस्तुति भेजी है। शुक्रवार को जेलर ने बैरकों की तलाशी ली। हालांकि कोई प्रतिबंधित सामग्री नहीं मिली। बुधवार की बैरक आठ में बंदी विपुल सिंह के द्वारा बंदियों को मारपीट कर घायल करने के बाद कारागार में सुरक्षा के और कड़े इंतजाम कर दिए गए हैं। रात में भी बंदीरक्षक बैरकों पर नजर रख रहे हैं।

कचहरी में रही कड़ी चौकसी
मऊ। जिला कारागार व अन्य जेलों से पेशी के लिए लाए गए बंदी से मिलने वालों पर पुलिस की कड़ी निगाह रही। पुलिस यह भी ध्यान दे रही थी कि कोई बंदियों को खाना-पीना तो नहीं दे रहा है। नशे में धुत बंदी विपुल सिंह के तांडव मचाने के बाद पुलिस की आंखें खुल गई हैं। पुलिस की नजर को भांपते हुए शुक्रवार को बंदी के परिजन और मिलने वाले भी नहीं फटके। बंदियों के साथ आई पुलिस भी काफी सख्ती बरते हुई थी।

खाकी की करतूत से उठने लगा भरोसा
मऊ। सुरक्षा और विश्वास का प्रतीक समझी जाने वाली पुलिस की खाकी से बढ़ते समय और ड्यूटी में लापरवाही से खाकी से लोगोें का भरोसा उठने लगा है। पुलिसकर्मियों द्वारा लोगोें से मारपीट करना, सुरक्षा मेें लापरवाही और रेप तक के मामले दर्ज किए जा चुके हैं। ऐसे मेें सुरक्षा का दंभ भरने वाली पुलिस की कार्य प्रणाली पर प्रश्नचिह्न लगने लगा है।
जिले मेें यदि पुलिसकर्मियों की करतूतों को देखा जाए तो पिछले साल सितंबर माह में ही दक्षिणटोला थाने पर तैनात सिपाही असलम पर दो लोगों के साथ मिलकर एक छात्रा के साथ दुष्कर्म करने का आरोप है। जिस पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर गैंगेस्टर तक की कार्रवाई की थी। अभी भी वह जेल की सलाखों में है। बंदी विपुल सिंह के साथ सुरक्षा में आए पुलिसकर्मी कमला प्रसाद और रामप्यारे के द्वारा लापरवाही बरते जाने पर बंदी ने कोल्ड ड्रिंक में शराब डालकर पी ली थी। हालांकि दोनों को निलंबित कर दिया गया। अभी यह मामला थमा ही नहीं था कि दक्षिणटोला थाने पर ही तैनात सिपाही राजेश नशे में धुत होकर सरेराह एक युवक को घायल कर दिया। इन दोनों सिपाहियोेेेेें के विरुद्ध भी मुकदमा दर्ज किया है। घोसी कोतवाली क्षेत्र के पांडेयपुर दलित बस्ती में अवैध शराब बेचवाने में संलिप्त सिपाही हिरेंद्र सिंह को पाए जाने पर उसे कोतवाली में आमद कराने के बाद विभागीय जांच की जा रही है। इस तरह की करतूतों से रक्षक के ही भक्षक बनने को लेकर लोगों का सुरक्षा पर से भरोसा उठने लगा है। हालांकि पुलिस अधीक्षक जोगेंद्र कुमार अनुशासन तोड़ने वालों पर कार्रवाई के लिए सख्त हिदायत भी दे चुके हैं। एसपी का कहना है कि अगर किसी भी पुलिस कर्मी के खिलाफ मामला सही पाया गया तो उसे किसी भी हालत मेें नहीं बख्शा जाएगा।

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