माइनरों मेेें टेल तक नहीं पहुंच रहा पानी

Mau Updated Fri, 31 Aug 2012 12:00 PM IST
मऊ। जिले के अधिकांश माइनरों में टेल तक पानी न पहुंचने से किसानों की मुश्किलें बढ़ती ही जा रही है। कई माइनरों में अभी तक पानी ही नहीं पहुुंच सका है। सिंचाई के अभाव में धान की फसल सूख रही है। परेशान किसान चाहकर भी कुछ नहीं कर पा रहे हैं। परेशान किसानों ने आला अधिकारियों को अवगत कराया बावजूद मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है।
जिले में कृषि योग्य कुल भूमि 145295.42 हेक्टेयर है। इनके सिंचाई के लिए जिले में करोड़ों की लागत से बनी तीन नहरें है। इन तीनों प्रमुख नहरों के 70 माइनर हैं, लेकिन अधिकांश माइनरों में टेल तक पानी नहीं पहुंच पाता है। चौधरी चरण सिंह पंप कैनाल दोहरीघाट एशिया में सुप्रसिद्ध है। इससे मऊ और बलिया मिलाकर लगभग 22 हजार भूमि सिंचित की जाने की क्षमता है। लेकिन आज 12 हजार भूमि भी सिंचित कर पाने में यह पंप कैनाल सक्षम नहीं हो पा रहा है। हालत यह है कि अधिकांश माइनरों में मानक के अनुरूप पानी न छोड़ने से टेल तक पानी नहीं पहुंच पा रहा है। माइनरों में नाम मात्र पानी आ रहा है। जो किसानों के किसी काम का नहीं है। शारदा सहायक लिंक नहर की हालत तो और बदतर है। नहर के अधिकांश माइनरों मेें कभी पानी ही नहीं आता है। कभी कभार दोहरीघाट पंप कैनाल से छोड़ दिया जाता है। इसकी सिंचित क्षमता मऊ-बलिया मिलाकर 52 हजार हेक्टेयर है। किसानों के दबाव में इंदारा रजवाहा में पानी छोड़ा तो गया है, लेकिन टेल तक नहीं पहुंच पा रहा है। कुछ किसान इंजन लगाकर सिंचाई कर रहे हैं। जबकि साधनविहीन किसान माइनर मेें आए पानी को निहार ही रहे हैं। सिपाह इब्राहिमाबाद संवाददाता : दोहरीघाट पंप कैनाल से संबद्ध सिपाह माइनर, बहरामपुर माइनर में धूल उड़ रही है। लंबे समय से पानी ही नहीं देखा गया। मधुबन माइनर, बीवीपुर सहित विभिन्न माइनरों में नाम मात्र पानी है। टेल तक पानी न पहुंचने से किसानों को नहर का लाभ नहीं मिल पा रहा है। इंदारा संवाददाता : शारदा सहायक खंड 32 में दोहरीघाट पंप कैनाल से नाम मात्र ही छोड़ा गया है, टेल तक पानी न पहुंचने से साधन संपन्न किसान इंजन लगाकर पानी चला दे रहे हैं। जबकि अन्य किसान टेल तक पानी का इंतजार कर रहे हैं।

टेल तक पानी न पहुंचने से किसानों में उबाल
मऊ। धान की फसल के पीक आवर में माइनरों में टेल तक पानी न पहुंचने से किसानों में आक्रोश पनप रहा है। किसान इस बात से परेशान है कि घाघरा में बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हो जा रही है जबकि माइनरों में टेल तक पानी ही नहीं पहुंच पा रहा है। दोहरीघाट पंप कैनाल को पूरी क्षमता से चलाने की मांग उठने लगी है। इस संबंध में संजय सिंह, रामनवल राही, देवप्रकाश राय, रणधीर सिंह, विनय कुमार राय, सुनील सिंह का कहना है कि जरूरत के समय नहर में मानक के अनुरूप पानी ही नहीं छोड़ा जाता है। कागज में नहर को पूरी क्षमता के साथ चलाया जाता है। टेल तक पानी न पहुंचने के चलते किसान सिंचाई नहीं कर पा रहे हैं। पंपिंग सेट से सिंचाई करने पर खेती की लागत बढ़ती ही जा रही है। 120 रुपये प्रति घंटे की दर से सिंचाई करना सबके वश की बात नहीं है।

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