कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय का हाल

Mau Updated Fri, 31 Aug 2012 12:00 PM IST
इंदारा। कोपागंज ब्लाक अंतर्गत देईथान में स्थापित कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय विभागीय उपेक्षा के चलते अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। दुर्व्यवस्था की स्थिति यह है कि विद्यालय की स्थापना के छह वर्ष बाद भी अध्ययनरत बालिकाओं को जमीन पर सोना पड़ रहा है। शासन द्वारा स्वीकृत आठ शिक्षकों के सापेक्ष एक फुल टाइम तथा तीन पार्ट टाइम शिक्षकों के भरोसे पठन पाठन चल रहा है। इससे बालिकाओं को गुणवत्तापरक शिक्षा नहीं मिल पा रही है।
शासन की ओर से निर्बल वर्ग की बालिकाओं को आठवीं कक्षा तक शिक्षा प्रदान कर स्वावलंबी बनाने की मंशा पर पानी फिरता नजर आ रहा है। कोपागंज ब्लाक मुख्यालय से तीन किमी दूर ग्रामीण अंचल में 13 अगस्त 2006 को कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय स्थापित किया गया। जहां 100 बालिकाएं अध्ययनरत हैं। इसके संचालन का जिम्मा महिला समाख्या केंद्र को सौंपा गया है। यहां आठ शिक्षिकाओं, तीन कुक, एक चपरासी तथा एक चौकीदार, आय व्यय के लिए एक एकाउंटेंट सहित 14 कर्मचारियों का पद स्वीकृत है। हालत यह है कि एक व्यायाम शिक्षिका फुल टाइम के रूप में तैनात है। बाकी तीन पार्ट टाइम शिक्षक हैं। कंप्यूटर, अंग्रेजी, गृह विज्ञान, विज्ञान, गणित के शिक्षकों का पद रिक्त चल रहा है। शिक्षा के अधिकार अधिनियम के तहत विषयवार शिक्षकों के तैनाती की अनिवार्यता है। शिक्षक के अभाव मेें विद्यालय में लगा कंप्यूटर शो पीस बनकर रह गया है। विद्यालय में बाउंड्री तो बनी है, लेकिन गेट का निर्माण पिछले चार माह से अधर मेें पड़ा है। इससे आवारा पशुओं तथा जंगली जानवरों के घुसने का खतरा बना रहता है। जल निकासी की समुचित व्यवस्था न होने से शौचालय का गंदा पानी परिसर में जाम पड़ा है। इससे मच्छरजनित बीमारियों के फैलने का खतरा बढ़ गया है।

जिला मुख्यालय से विद्यालय चला रही हास्टल वार्डेन
इंदारा। कोपागंज ब्लाक अंतर्गत देईथान में स्थापित कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय में हास्टल वार्डेन का पद रिक्त चल रहा है। हास्टल वार्डेन का दायित्व महिला समाख्या केंद्र की जिला समन्वयक रेखा श्रीवास्तव को सौंपा गया है। क्षेत्रीय नागरिकों की मानें तो हास्टल में रह रही बालिकाओं को व्यायाम शिक्षिका के भरोसे छोड़कर जिला समन्वयक व प्रभारी हास्टल वार्डेन जिला मुख्यालय स्थित अपने केंद्र पर निवास करती हैं। इस संबंध में जिला पंचायत सदस्य गीता राजभर ने आक्रोश जाहिर करते हुए कहा कि बालिकाओं को योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है। महकमे की ओर से मामले की जांच नहीं कराई गई तो हम लोग धरना-प्रदर्शन करने को बाध्य हो जाएंगे।

क्या कहते हैं अधिकारी
जिला समन्वयक कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय बालिका अखिलेश सिंह ने बताया कि मामला संज्ञान में है। शासन को रिपोर्ट भेजी जाती है। वहीं महिला समाख्या की जिला समन्वयक रेखा श्रीवास्तव ने बताया कि रिक्त पड़े शिक्षकों के पद पर चयन हो चुका है। परिणाम घोषित होते ही शिक्षक कार्यभार संभाल लेंगे। साथ ही रात्रिकालीन विश्राम उसी स्थिति में नहीं हो पाता है जब प्रशासनिक कार्यों से मैं बाहर रहती हूं। लेकिन उक्त शिक्षिका के अलावा मेरी प्रतिनिधि वहां मौजूद रहती हैं।

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