विवेकाधीन अधिकार बना विवेकहीन फैसला

Mau Updated Sun, 26 Aug 2012 12:00 PM IST
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मऊ। सीबीएसई तथा आईसीएसई बोर्ड से संचालित विद्यालयों की तरह जिले में यूपी बोर्ड के सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों को समकक्ष लाकर खड़ा करने के लिए शासन की मंशा विफल होती नजर आ रही है। अधिकांश सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में अवकाश अधिक होने से पठन पाठन प्रभावित हो रहा है। छात्रों को कोर्स पिछड़ने की चिंता अभी से सताने लगी है। अभिभावकों ने सीएम को पत्र भेजकर मामले की ओर ध्यान आकृष्ट करने की गुहार लगाई है।
जनपद में 67 सहायता प्राप्त इंटर कालेज हैं। कालेजों में मनमाने तरीके से अवकाश करने से छात्रों और अभिभावकों में आक्रोश पनप रहा है। विद्यालयों में हुई छुट्टियों पर नजर डाला जाए तो पहली जुलाई से शुरू हुए सत्र में पहले दिन रविवार होने और निकाय चुनाव के चलते शिक्षण संस्थाएं बंद रही। बाद में भीषण गर्मी का हवाला देते हुए शासन ने सभी शिक्षण संस्थाओं मेें छठवीं से आठवीं तक के बच्चों की आठ जुलाई तक छुट्टी कर दी थी। इसका लाभ उठाकर इंटर कालेजों में 12वीं तक की कक्षाओं को भी बंद कर दिया। इससे एडमीशन आदि प्रभावित हुआ था। इसके बाद नौ और दस अगस्त को जन्माष्टमी की दो दिन की छुट्टी की गई। 11 अगस्त को शनिवार होने के कारण अधिकतर शिक्षण संस्थाएं प्रधानाचार्य के विवेकाधीन कोटे से बंद रही। इसके बाद 17 अगस्त को अलविदा जुमा होने तथा 20 अगस्त को ईद थी। जिसकी छुट्टियों को मिलाते हुए पांच दिन की सभी शिक्षण संस्थाओं में छुट्टी कर दी गई थी। यह तो एक बानगी है। अभी कई त्यौहार आएंगे तो भीषण ठंठी भी पड़ेगी। शिक्षण सत्र के साथ ऐसा खिलवाड़ प्रधानाचार्यों द्वारा अपने शिक्षकों को खुश करने के चक्कर में पूरे साल चलता रहता है और छात्रों की पढ़ाई इसकी भेंट चढ़ जाती है। पूछने पर टका सा जवाब होता है यह प्रधानाचार्य का विवेकाधीन अधिकार होता है। जबकि प्रधानाचार्य का विवेकाधीन कोटा पूरे सत्र मेें तीन दिन ही होता है। जिसमें वह किसी विशेष परिस्थिति में ही अवकाश घोषित कर सकता है।

आखिरकार बच्चों को कैसे पढ़ाया जाएगा 220 दिन
मऊ। जनपद में स्थापित सवित्त कालेजों में लगभग एक लाख से अधिक छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। महकमे की ओर से शिक्षण सत्र 220 दिन निर्धारित है। अभिभावकों केे अनुसार अधिकांश विद्यालयों में प्रत्येक वर्ष 220 दिन पूरा नहीं हो पाता है। जबकि शिक्षण सत्र के शुरूआती दौर में ही काफी छुट्टियां हो चुकी हैं। शिक्षा के अधिकार अधिनियम के तहत छठवीं से आठवीं तक के बच्चों को 220 दिन पढ़ाना अनिवार्य किया गया है। छुट्टियों की रफ्तार यही रही तो कैसे आदेश का अनुपालन होगा।

एक दिन पर खर्च होता है लगभग 134 लाख
मऊ। सरकार की ओर से जिले के सवित्त कालेजों को छात्रों को गुणवत्तापरक शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए शिक्षकों, शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को काफी सुविधा प्रदान कर रही है। एक दिन चलाने में प्रति कालेज पर लगभग दो लाख से अधिक रुपया खर्च होता है। यानि महकमे की ओर से जिले के सवित्त कालेजों को एक दिन चलाने में लगभग 134 लाख रुपये से अधिक का खर्च आता है।

मनमानी छुट्टियों के होने से अभिभावकों में उबाल
मऊ। जनपद में स्थापित सवित्त कालेजाें में मनमाने तरीके से अवकाश घोषित किए जाने से अभिभावकों तथा छात्रों तथा प्रबुद्ध वर्ग में आक्रोश बढ़ने लगा है। इस संबंध में संजय सिंह, हरिहर सिंह, श्रीकांत राय, सुरेश सिंह का कहना था कि कालेजों में मनमानी छुट्टियां, शिक्षकों के धरना प्रदर्शन सहित विभिन्न कारणों से प्रति वर्ष शिक्षण सत्र सिमटता जा रहा है। सत्र कम चलने से कोर्स भी पूरा नहीं हो पाता है। इस वर्ष भी मनमानी छुट्टियों के होने से सत्र का सिमटना तय है। मामले की जांच नहीं करायी गई तो हम लोग चुप नहीं बैठेंगे।

अधिकांश महाविद्यालयों में नहीं शुरू हो सकी कक्षाएं
मऊ। शिक्षा सत्र के दूसरा माह बीतने में चंद दिन शेष रह गए हैं। लेकिन जनपद में स्थापित अधिकांश महाविद्यालयों में कक्षाएं शुरू नहीं हो सकी है। छात्र कक्षाओं को चलाने के लिए आंदोलन की रणनीति बनाने में जुट गए हैं। जनपद में दो राजकीय, चार सहायता प्राप्त सहित वित्तविहीन कालेज स्थापित हैं। डीसीएसके पीजी कालेज के छात्र तो कक्षाओं के संचालन सहित विभिन्न मांगों को लेकर चक्काजाम भी कर चुके हैं। अब वह भूख हड़ताल करने की रणनीति तय करने में जुट गए हैं। इसके बाद भी शिक्षा विभाग और विश्वविद्यालय प्रशासन उदासीनता बरत रहा है।

क्या कहते हैं अधिकारी
जिला विद्यालय निरीक्षक सुनील दत्त का कहना है कि मामला संज्ञान में नहीं है। छात्रों के भविष्य का पूरा ख्याल रखा जाएगा। पूरे मामले की जांच की जाएगी। शीघ्र ही दिशा निर्देश जारी कर दिया जाएगा।

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