विदेश जाने वाले हजारों के अरमानों पर फिर रहा पानी

Mau Updated Sun, 26 Aug 2012 12:00 PM IST
मऊ। अगर आप विदेश जाने के इच्छुक हैं तो अभी आपकी हसरतों पर ब्रेक लग सकता है। कारण कि सूबे के विभिन्न जिलों से भेजे गए तकरीबन साठ हजार से अधिक पासपोर्ट आवेदन प्रपत्र एक जून से क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय लखनऊ में डंप पड़े हैं और सत्यापन के लिए वापस जिलों को नहीं भेजे जा सके हैं। हालत यह है कि जहां एक ओर जरूरतमंद रोजाना पुलिस कार्यालयों की परिक्रमा कर रहे हैं। वहीं दूसरी ओर क्यों फार्म वापस नहीं आ रहे हैं इस बात का पुलिस विभाग के पास भी कोई जवाब नहीं है। हालांकि क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी के अनुसार ऐसा कोई मामला संज्ञान में नहीं है।
शिक्षा, व्यापार और पर्यटन के उद्देश्य से हाल-फिलहाल के वर्षों में विदेश जाने वालों की संख्या में काफी बढ़ोतरी हुई है। लेकिन सूबे में क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय की सुस्त कार्यप्रणाली लोगों की हसरतों में बाधा पड़ रही है। नियमानुसार पासपोर्ट का फार्म एक हजार रुपये के ड्राफ्ट के साथ अभ्यर्थी द्वारा जमा करने पर वह जिले से क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय लखनऊ भेजा जाता है। यहां से वापस सत्यापन हेतु पुलिस अधीक्षक कार्यालय को भेजा जाता है। लेकिन वर्तमान में फार्म लखनऊ में ही डंप हैं। विभागीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार मऊ जिले के 2700 से अधिक, आजमगढ़ के 4200 से अधिक, देवरिया के 3500 से अधिक, बलिया के 3100 से अधिक, गाजीपुर के 2900 से अधिक, कुशीनगर के 4200 से अधिक, अंबेडकरनगर के 2200 से अधिक समेत विभिन्न जिलों के लगभग साठ हजार से अधिक पासपोर्ट आवेदन प्रपत्र एक जून के बाद सत्यापन हेतु क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय लखनऊ द्वारा जिलों के एसपी कार्यालयों को भेजे ही नहीं गए। ऐसा क्यों हो रहा है इसका जवाब किसी के पास नहीं है। ऐसे में जिनको व्यापार और शिक्षा आदि के उद्देश्य से विदेश यात्रा पर जाना था उनके अरमानों पर पानी फिरता नजर आ रहा है। इस बाबत क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी लखनऊ जयप्रकाश सिंह ने बताया कि फिलहाल ऐसा मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। पासपोर्ट तो बन ही रहे हैं। लेकिन यदि आप बता रहे हैं तो मैं पूरे मामले को दिखलवाता हूं।

आनलाइन फार्मेट से हो रही है देरी
मऊ। विभागीय सूत्रों के अनुसार जिलों से जो फार्म भेजे जा रहे हैं बीते तीन महीने से उनकी आनलाइन इंट्री की शुरूआत एक निजी कंपनी से ठेके पर कराई गई है। फार्मों की इंट्री धीमी गति से हो पाने से सत्यापन के लिए कम फार्म ही जिलों में भेजे जा रहे हैं। हालांकि अधिकारी आश्वस्त हैं कि 15 अक्टूबर के बाद समस्या से निजात मिल जाएगी।

ड्राफ्ट की मियाद खत्म होने का समाया डर
मऊ। पासपोर्ट के लिए आवेदन किए अभ्यर्थियों को ज्यादा डर इसी बात का है कि कहीं लगाए गए ड्राफ्ट की मियाद न खत्म हो जाए। क्योंकि ड्राफ्ट की वैधता अवधि तीन माह तक ही होती है। कई आवेदन तीन माह से ज्यादा दिन के पड़े हैं।

प्रदेश सरकार को केंद्र से मिलते हैं पैसे
मऊ। लखनऊ से सत्यापन के लिए पासपोर्ट आवेदन पत्र आने पर पुलिस विभाग की स्थानीय खुफिया इकाई द्वारा यदि बीस दिन के भीतर सत्यापन कर दिया जाता है तो इसके एवज में केंद्र सरकार राज्य सरकार को सौ रुपये देती है। यदि सत्यापन कार्य महीने भर में होगा तो पच्चीस रुपये मिलते हैं। यदि सत्यापन समय से नहीं हो पाता तो दंड के लिए भी प्रावधान है।

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