कैसे मिले खाद, अधिकारी और नेता साधे हैं चुप्पी

Mau Updated Sat, 25 Aug 2012 12:00 PM IST
मऊ। न हो कमीज तो पांवों से पेट ढंक लेंगे। ये लोग कितने मुनासिब हैं इस सफर के लिए। कवि दुष्यंत ने शायद यह पंक्तियां किसानों के ऐसे ही हालातों को देखकर लिखीं होगी। शासन-प्रशासन, राजनीतिक पार्टियों से लेकर हर कोई किसानों की बेहतरी की ही बात करता फिरता है। लेकिन उनकी हालत क्या है और कैसे वह अपना और लोगों का पेट भर रहे हैं इसकी किसी को फिक्र नहीं है। पिछले नौ दिनों से साधन सहकारी समितियों के सचिवों की हड़ताल के बाद उन्हें यूरिया ब्लैक में खरीदनी पड़ रही है। अधिक दाम पर धक्के खाने के बाद वह अपने खेत में जाकर धान की फसल को किसी तरह जिंदा कर रहे हैं लेकिन उनकी इस समस्या को लेकर न तो शासन गंभीर है और न ही प्रशासन। यही नहीं जनप्रतिनिधि भी सो रहे हैं और अपने ही रुआब में हैं। जनप्रतिनिधि ठहरे विधानसभा के राजा तो बेचारे गरीब किसानों की हिम्मत कहां है कि उनसे बात कर उनकी समस्या जान लें।
जिले में किसानों को खाद बीज उपलब्ध कराने के लिए 92 साधन सहकारी समितियों के साथ ही 10 पीसीएफ, 10 डीसीएफ, दो एग्रो सहित अन्य केंद्र खोले गए हैं। वहीं 300 से अधिक निजी दुकानों को भी लाइसेंस जारी किया गया है। जिले में खाद बीज को लेकर जब पीक आवर की शुरुआत होती है उसी समय प्रशासन की सारी व्यवस्था किंही न किंही कारणों से फेल साबित होने लगती है। कभी जानबूझ कर खाद बीज रहने के बाद भी क्राइसिस होती है तो कभी किसानों को लाठियां तक खानी पड़ती है। इधर आंशिक सूखे की भय से किसान जूझ रहे हैं। पीली पड़ रही फसल को जिंदा करने के लिए उन्हें यूरिया की सख्त जरूरत है। किसानों के लिए जिले की सबसे बड़ी व्यवस्था साधन सहकारी समितियों पर पिछले नौ दिनों से ताला लटका हुआ है। प्रदेश व्यापी हड़ताल का लाभ यहां निजी दुकानदार एवं अन्य केंद्र उठा रहे हैं। साधन सहकारी समितियों पर खाद बीज न जाने के चलते किसान मारे मारे फिर रहे हैं। इसके बदले कोई अन्य व्यवस्था न होने से उन्हें पीसीएफ, डीसीएफ, एग्रो और निजी दुकानों का सहारा लेना पड़ रहा है लेकिन वहां भी उन्हें अधिक मूल्य देकर ही चोर दरवाजे से खाद लेनी पड़ रही है। इस संबंध में एआर कोआपरेटिव का कहना है कि उन्होंने सहकारी समितियों की खाद को अन्य केंद्रों के लिए स्थानांतरित कर दी गई है।

कब आई और कब खत्म हो गई खाद पता नहीं
मधुबन। जिले में साधन सहकारी समितियों पर ताला लटके होने के चलते किसानों की क्या दुर्दशा है इसे मधुबन के अलीपुर निवासी भल पांडेय और नंदौर निवासी बृजबिहारी मल्ल की जुबानी खुद सुना जा सकता है। कहते हैं धान की रोपाई के समय से लेकर सिंचाई के लिए खाद के लिए जलालत झेलनी पड़ रही है। साधन सहकारी समितियां बंद होने से पीसीएफ और डीसीएफ के केंद्रों पर कब खाद आई और कब खत्म हो गई इसका पता किसानों को नहीं चला। इसके चलते निजी दुकानों से ब्लैक रेट पर 400 रुपये तक में खाद खरीदनी पड़ी है। अब ब्लैक रेट की शिकायत करने कोई जाए या धान की फसल को बचाए यह सोचकर किसान जैसे तैसे भी खाद खरीदनी पड़ती है खरीदते हैं। यही नहीं चुप रहना भी उनकी मजबूरी है कि कहीं वह भी न मिले। कहा कि साधन सहकारियों पर हड़ताल के चलते वहीं पर जिला प्रशासन को स्टाल लगवाकर खाद का वितरण उचित मूल्य पर करना चाहिए।

क्या कहते हैं विधायक
मुहम्मदाबाद गोहना के विधायक बैजनाथ पासवान ने बताया कि क्षेत्र में खाद की समस्या होने पर उन्होंने डीएम से बात कर केंद्रों पर यूरिया उपलब्ध कराई। सरौदा में शिकायत पर वहां भी यूरिया उपलब्ध कराई। क्षेत्र में खाद की कमी नहीं होने दी जाएगी।

मधुबन के बसपा विधायक उमेश पांडेय का कहना है कि किसानों के लिए सपा सरकार में किए गए सभी दावे खोखले हैं। खाद बीज को लेकर अधिकारी तक नहीं सुन रहे हैं। इस पर विधानसभा में आवाज उठाऊंगा।

विधायक जी सो रहे हैं
घोसी विधायक सुधाकर सिंह से किसानों के मुद्दे पर तीन बार बात करने का प्रयास किया गया। इसमें एक बार पता चला कि वह सो रहे हैं। दूसरी बार भी किसानों के मुद्दों पर बात करने का प्रयास किया गया तो वह व्यस्त होने के चलते बात करने की जरूरत नहीं समझे।

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