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घाघरा स्थिर पर कहर बरपाने को बेताब

Mau Updated Sat, 25 Aug 2012 12:00 PM IST
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दोहरीघाट। घाघरा का जलस्तर स्थिर रहने के बाद भी कटान की तीव्रता तेज हो गई है। हजारों एकड़ फसल डूब जाने से पशुओं के चारे की किल्लत बढ़ गई है। नदी का पानी जर्जर बंधों पर टकराने से सैकड़ों गांवों का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है। कटान जारी रहने से ऐतिहासिक धरोहरों तथा तटवर्ती इलाकों का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है। लेकिन प्रशासन की ओर से बाढ़ से बचाव के लिए कोई इंतजाम नहीं किया जा सका है।
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घाघरा के खतरा निशान से पांच सेमी ऊपर बहने से किसानों की मुश्किलें बढ़ती ही जा रही है। नदी में आई बाढ़ से डूबी खून पसीने की कमाई धान की फसल को दूर से ही निहार रहे हैं। नदी कहर बरपाने को बेताब दिख रही है। जलस्तर पर नजर डाला जाए तो गुरुवार को 69.95 मीटर पर बह रही थी। गौरीशंकर घाट पर खतरे का निशान 69.90 मीटर आंका गया है। दूसरी ओर हाहानाला गेज प्वाइंट पर खतरे का निशान 66.30 मीटर आंका गया है। घाघरा की लहरें भारत माता मंदिर और मुक्तिधाम पर टक्कर मार रही हैं। वहीं धनौली रामपुर गांव के पास नागा बाबा की कुटी, ब्रह्मचारी बाबा की कुटी के पास, नई बाजार के सरहरा, रसूलपुर, आश्रम, मोर्चा सहित विभिन्न इलाकों में कटान तेज होने से तटवर्ती इलाके के लोगों के माथे पर चिंता की लकीरें दिखाई देने लगी है। घाघरा मेें कटान जारी रहने से नगर की ऐतिहासिक धरोहरें मुक्तिधाम, दुर्गा मंदिर, शाही मस्जिद, लोक निर्माण विभाग का डाक बंगला और मुक्तिधाम, रसूलपुर में श्रवण कुमार के अंधे माता पिता का मंदिर, धनौली रामपुर का देई माई स्थान सहित विभिन्न धरोहरों का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है। वहीं तटवर्ती इलाकों धनौली रामपुर, नई बाजार, नौली, चिऊंटीडांड़, लामी, तारनपुर, कादीपुर, हरधौली, बहादुरपुर, बुढावर, पतनई, सरयां, ठिकरहिया, नगरीपार सहित दर्जनों गांवों में बाढ़ आने का खतरा बरकरार है। फसलों के पानी में डूबने के चलते पशुओं के लिए चारे का संकट उत्पन्न हो गया है। इस संबंध में भाजपा नेता विनय राय, प्रजापति राय, चंद्रिका प्रसाद, संतोष प्रसाद, रमेश प्रसाद ने कहा कि प्रतिवर्ष बाढ़ में व्यापक पैमाने पर नुकसान होता है, लेकिन आज तक एक पाई मुआवजा नहीं मिला है। कागज पर ही बचाव कार्य होता है। हर रोज उपजाऊ जमीन नदी में विलीन हो रही है। लेकिन प्रशासन की ओर से कटान रोकने तथा बाढ़ से बचाव के उपाय तक नहीं किया जा सका है।

जर्जर बंधों पर मरम्मत कार्य न होने से ग्रामीणों में उबाल
दोहरीघाट। घाघरा की तबाही से बचाने के लिए बनाए गए धनौली लोहड़ा, नौली-चिऊटीडांड़, बीवीपुर-बेलौली बंधा सहित विभिन्न बंधे जर्जर हाल में पहुंच गए हैं। बंधों में कई जगह दरारें पड़ गई हैं। यही नहीं जानवरों ने सुरंग बना दिया है। घाघरा नदी के स्थिर रहने के बाद भी मरम्मत कार्य न होने से लोगों में आक्रोश पनप रहा है। इस संबंध में क्षेत्र के संतोष कुमार, प्रजापति मौर्य, रामाश्रय यादव, रामसमुझ यादव, गिरधारी प्रसाद का कहना है कि बंधों पर मरम्मत कार्य कागज पर ही होता है। जर्जर बंधों की मरम्मत के मामले में सिंचाई महकमे के आला अधिकारी उदासीन बने हैं। उन्होंने कहा कि बंधों की मरम्मत अविलंब शुरू नहीं कराई गई तो हम लोग आंदोलन करने के लिए बाध्य हो जाएंगे।

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