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तकनीक से तारतम्य बैठा रहे जवान

Mau Updated Mon, 20 Aug 2012 12:00 PM IST
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मऊ। पुलिस की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता को लेकर भारत सरकार की अति महत्वाकांक्षी योजना सीसीटीएनएस यानी क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम के प्रशिक्षण की शुरूआत जिले में हो गई है। योजना के अंतर्गत पूरे देश के सभी थानों, पुलिस अधिकारियों के कार्यालय, पुलिस कंट्रोल रूम और जांच एजेंसियों को कंप्यूटराइज्ड कर नेटवर्किगिं के माध्यम से आपस में जोड़ने की व्यवस्था है। उक्त प्रशिक्षण के लिए राज्य सरकार द्वारा दो लाख अड़सठ हजार का बजट जिला पुलिस को दिया गया था।
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एसपी जोगेंद्र कुमार ने रविवार को अमर उजाला को बताया कि शासनादेश के अनुक्रम में तेरह अगस्त से पुलिस कार्यालय में सीसीटीएनएस प्रशिक्षण की शुरूआत हो गई है। यह तीन स्तर पर होगा। इसमें प्रति सप्ताह आठ पुलिसकर्मियों को रोजाना आठ घंटे का कंप्यूटर प्रशिक्षण दिया जाना है। दारोगा और उनसे ऊपर के सभी कर्मियों के लिए यह अनिवार्य है। जबकि सिपाहियों को रुचि लेने और तकनीकी ज्ञान की जानकारी रखने वालों को ही प्रशिक्षित किया जाएगा। प्रशिक्षण में यह सिखाया जाएगा कि पद अनुरूप करने वाले लिखा पढ़ी के कार्यों को कंप्यूटर में कैसे करना है जिससे वह आनलाइन रिकार्ड के रूप में दर्ज हो जाएं। यह प्रशिक्षण निट के प्रशिक्षक द्वारा जिले में दिया जा रहा है। प्रशिक्षण सही से हो इसके लिए जिला स्तरीय मिशन टीम बनाई गई है। इसके अध्यक्ष एसपी हैं। साथ ही एएसपी, सीओ, डीसीआरबी प्रभारी और एनआईसी का व्यक्ति सदस्य हैं। प्रशिक्षण पश्चात योजना के अगले चरण में सभी थानों को चार-चार कंप्यूटरों से लैस किया जाएगा। कुल मिलाकर अब यह कहा जा सकता है कि वर्ष 2014 की शुरूआत पर पुलिस विभाग से कागज और कलम की छुट्टी हो जाएगी।

आमजन और पुलिस दोनों को मिलेगा लाभ
मऊ। योजना के क्रियान्वयन से जहां आम आदमी घर बैठे ही अपनी शिकायत दर्ज करा लेगा। वहीं चरित्र सत्यापन, नौकरों व किराएदारों का सत्यापन और शस्त्र लाइसेंस आदि का आवेदन घर से ही संभव होगा। दूसरी ओर पुलिस विभाग को भी योजना से काफी राहत मिलेगी। मैनुअल कार्यों में जहां एक ओर कमी आएगी वहीं कहीं के भी अपराधी का रिकार्ड मिनटों में प्राप्त किया जा सकेगा। अधिकारियों को भी थानों और विवेचनाओं की आनलाइन मानीटरिंग में सहूलियत मिलेगी। सबसे बड़ी बात बिजली की समस्या से निजात के लिए थानों को जनरेटर का दिया जाना भी योजना में प्रमुखता से शामिल है। बहरहाल यह कहा जा सकता है कि साल भर बाद पुलिस की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता के समावेश की पुरजोर गुंजाइश होगी।

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