समितियों पर लटका ताला, किसान परेशान

Mau Updated Sat, 18 Aug 2012 12:00 PM IST
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मऊ। धान की फसल के पीक आवर में यूरिया के लिए मारामारी मची है। सचिवों की हड़ताल के चलते साधन सहकारी समितियों पर ताला लटक रहा है। पीसीएफ, डीसीएफ सहित अन्य उर्वरकों के केंद्र अधिकांश न्याय पंचायतों में नहीं है। समितियों पर खाद न मिलने से निजी दुकानदारों की चांदी कट रही है। वह किसानों से मनमाना दाम वसूल रहे हैं। आश्चर्यजनक स्थिति यह है कि सहकारिता विभाग सचिवों के हड़ताल के मद्देनजर वैकल्पिक व्यवस्था करने के बजाय आवंटन की खाद को पीसीएफ, डीसीएफ, इफको सहित अन्य केंद्रों को जारी कर दिया है। वहीं प्रशासन की ओर से समितियों के माध्यम से खाद वितरण की ठोस योजना तक नहीं बनाई जा सकी है। इससे किसान आक्रोशित हैं।
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किसानों को खाद उपलब्ध कराने के लिए जनपद मेें 92 साधन सहकारी समितियां, 10 पीसीएफ, 10 डीसीएफ, एग्रो के दो तथा इफको सहित अन्य केंद्रों की स्थापना की गई है। इसके अलावा 300 से भी ज्यादा निजी दुकानदारों को लाइसेंस जारी किया गया है। वेतन सहित विभिन्न मांगों को लेकर सचिवों के हड़ताल पर चले जाने से किसानों की मुश्किलें बढ़ती ही जा रही है। सचिवों की हड़ताल के बाद प्रशासन की ओर से खाद वितरण के लिए वैकल्पिक व्यवस्था न होने से किसान खाद के लिए दर-दर भटक रहे हैं। अगस्त में सहकारिता के लिए 2600 एमटी यूरिया जारी की गई है। जबकि एक हजार एमटी यूरिया बफर में है। यूरिया की रैक अभी आई नहीं है। सचिवों की हड़ताल के चलते सहकारिता विभाग ने पीसीएफ, डीसीएफ, इफको, एग्रो सहित अन्य केंद्रों को यूरिया जारी किया है। जबकि समितियों के माध्यम से खाद वितरण की वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की जा सकी है। प्रशासनिक अव्यवस्था के चलते तथा लाइसेंसीधारी निजी दुकानदारों पर प्रशासनिक शिकंजा न होने से किसानों को यूरिया सहित अन्य उर्वरक अधिक दाम पर खरीदना पड़ रहा है। समितियों पर खाद न मिलने से निजी दुकानदार किसानों से यूरिया 400 रुपये तक प्रति बोरी वसूल रहे हैं। कुल मिलाकर किसानों को निर्धारित मूल्य पर खाद वितरण की व्यवस्था करने में आला अधिकारी गंभीर नजर नहीं आ रहे हैं।
निजी दुकानदारों ने खाद बेचने का तरीका बदला
मऊ। जिले के विभिन्न इलाकों में प्रशासन की ओर से शासन द्वारा निर्धारित मूल्य पर खाद वितरण के लिए निजी दुकानदारों को लाइसेंस जारी किया गया है। निजी दुकानदारों ने खाद बेचने के स्टाइल में बदलाव कर दिया है। निजी दुकानदार प्रशासन की ओर से जारी खाद को किसी अन्य स्थान पर रखवा दे रहे हैं। दुकान पर खाद रखते ही नहीं हैं। किसानों को मनमाने दाम पर बैक डोर से खाद बेच रहे हैं। विरोध जताने वाले किसानों को खाद न होने की बात कहकर बैरंग लौटा दे रहे हैं।

क्या कहते हैं किसान
अधिक दाम पर खाद मिलने से किसानों में उबाल
मऊ। बारिश होने के बाद जिले के विभिन्न इलाकों में यूरिया की मांग बढ़ गई है। पीक आवर में निर्धारित दर पर यूरिया न मिलने से किसानों में आक्रोश पनप रहा है। इस संबंध में संजय सिंह, रामनवल राही, देवप्रकाश राय, तेगा सिंह एडवोकेट, संतोष पांडेय, सूर्यकांत यादव ने कहा कि जरूरत के समय खाद वितरण की व्यवस्था ही नहीं रहती है। समितियों पर यूरिया के समय डीएपी की आपूर्ति की जाती है। डीएपी के समय यूरिया की आपूर्ति की जाती है। पीक आवर में समितियों पर ताला लटक रहा है। समितियों पर खाद न होने से निजी दुकानदार मनमाने दाम पर बेच रहे हैं। शिकायत के बाद भी कागज पर ही छापेमारी की जा रही है।

क्या कहते हैं अधिकारी
जिला कृषि अधिकारी एनके त्रिपाठी का कहना था कि अधिक दाम पर उर्वरक बेचने वाले दुकानदारोें के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी। वहीं एआर साधन सहकारी समितियां आरपी सक्सेना का कहना था कि सचिवों के हड़ताल के चलते पीसीएफ, डीसीएफ सहित अन्य केंद्रों को यूरिया जारी की गई है।
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