आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों की जांच बनी सिर दर्द

Mau Updated Tue, 14 Aug 2012 12:00 PM IST
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मऊ। बाल विकास पुष्टाहार विभाग में आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों की तैनाती में एक के बाद एक आ रहे फर्जीवाड़े के मामले में न सिर्फ विभाग की पोल खुल रही है बल्कि आय प्रमाण पत्र विभाग के सिर का दर्द बन गया है। पिछले पांच वर्षों में 100 से अधिक आय प्रमाण पत्र फर्जी पाए जा चुके हैं वहीं एक दर्जन से अधिक का मामला अभी भी न्यायालय में लंबित चल रहा है। नियुक्ति के समय विभागीय कृपा और कागजों में हेराफेरी से नौकरी तो आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को मिल जाती है लेकिन बाद में वही विभाग के लिए सिर का दर्द बन जाता है।
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जिले में 2587 आंगनबाड़ी केंद्र स्थापित हैं जहां आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों की तैनाती की गई है। आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों की नियुक्ति का सैकड़ों मामला जांच के घेरे में चल रहा है। अब तक 100 से अधिक मामलों का कोर्ट या विभागीय जांच के बाद निस्तारण हो चुका है। इन मामलों में अधिकांश मामलों में आय प्रमाण पत्र में ही हेराफेरी करने का मामला उजागर हुआ। राजस्व विभाग द्वारा बनाए गए इन आय प्रमाण पत्रों में हेराफेरों में कर कम आय का फर्जी प्रमाण पत्र उसी नंबर पर बनवाने का अधिकांश मामला प्रकाश में आने पर विभाग से बर्खास्त या निलंबन की कार्रवाई करने के बाद मुकदमा भी पंजीकृत कराया गया है। हालत यह है कि नियुक्ति का अधिकांश मामला हाईकोर्ट तक पहुंच जा रहा है। इससे विभाग का अधिकतर समय भी आंगनबाड़ी की नियुक्ति के प्रकरण को लेकर ही नष्ट हो रहा है। जब कि नियुक्ति के समय न तो विभाग और न ही राजस्व विभाग से आय प्रमाण पत्रों के बारे में कोई जांच पड़ताल की जाती है। जब कि नियुक्ति के समय विभाग राजस्व विभाग से पुष्टि भी करता तो भी विभाग का कीमती समय एवं सरकारी धन की बर्बादी नहीं होती। अभी भी विभाग में एक दर्जन से अधिक मामले लंबित चल रहे हैं। जिसमें विभागीय अधिकारियों या कर्मचारियों को कोर्ट में उपस्थित होना पड़ता है। इस संबंध में जिला कार्यक्रम अधिकारी एसके सिंह का कहना है कि आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों के आय प्रमाण पत्र का मामला उन्हीं के विभाग के लिए मुसीबत बना हुआ है। जब कि इसका संबंध राजस्व विभाग से है। बताया कि अधिकांश मामला कोर्ट में होने के चलते इस संबंध में शासन को पत्र लिखकर भी अवगत कराया गया है कि इन मामलों को राजस्व विभाग को सौंपा जाए।
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