अब कैसे हो किसानों की समस्या का समाधान

Mau Updated Mon, 13 Aug 2012 12:00 PM IST
मऊ। जनपद में किसानों की समस्याओं का समाधान कराने के लिए किसान काल सेंटर सफेद हाथी के समान साबित हो रहा है। आधुनिक कृषि तकनीक सहित विभिन्न योजनाओं की जानकारी पाने के लिए किसान अधिकारियों के कार्यालय का चक्कर काट रहे हैं।
जनपद के अधिकांश लोगों की जीविका का साधन कृषि और पशुपालन है। गांव-गांव में किसानों के लिए कृषि विभाग से जुड़े अधिकारियों, कर्मचारियों और कृषि विशेषज्ञों का दर्शन दुर्लभ होता है। यही नहीं किसान कृषि संबंधी जानकारी हासिल करने के लिए ब्लाक सहित जनपद के कार्यालय भी जाते हैं तब भी निराश ही लौटना पड़ता है। किसानों की समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए वर्ष 1999 में केंद्र की सत्ता में आई राजग सरकार ने मुफ्त किसान काल सेंटरों की स्थापना की। इसके तहत उप्र में नरेंद्र देव कृषि विश्वविद्यालय, कुमारगंज फैजाबाद में भी काल सेंटर की स्थापना की गई। विभागीय लापरवाही की स्थिति यह है कि जागरूकता कार्यक्रम सिर्फ कागज पर चलाने से यह योजना बेमतलब साबित हो रही है। जबकि काल सेंटरों पर बैठने वाले कृषि विशेषज्ञों पर करोड़ों रुपये खर्च किया जा रहा है। काल सेंटर के माध्यम से किसानों की समस्या उन्हीं की भाषा में सुलझाने के लिए शासन स्तर से 1551, 18001038886, 18001808752 नंबर की सुविधा दी गई थी। लेकिन चाहकर भी किसान लाभ उठा नहीं पा रहे हैं। तकनीकी खामी पर नजर डाला जाए तो यह नंबर केवल बीएसएनएल के लैंडलाइन फोेन से ही संभव है। इसकी संख्या पूरे जनपद में 1500 के आसपास है। इसमें अधिकतर फोन पीसीओ या कार्यालयों के हैं। चंद किसानाें के पास ही लैंड लाइन फोन हैं। अधिकांश किसानों के पास मोबाइल फोन है। किसानों के अनुसार घंटों मिलाने के बाद भी उस पर म्यूजिक सुनायी देता है, नंबर व्यस्त बताता है या काल नाट रिस्पांडिंग आता है। जिला कृषि अधिकारी एनके त्रिपाठी ने बताया कि हमारे स्तर का मामला नहीं है। शिकायत का निस्तारण नरेंद्र देव विवि से ही संभव हो सकता है। कभी-कभी ऐसा हो सकता है कि फोन न लग पाए।

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