मधुबन थाने पर कब्जा करने की सूचना पर थाने पहुंचा मि. निबलेट

Mau Updated Mon, 13 Aug 2012 12:00 PM IST
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मऊ। 15 अगस्त 1942 को ही अंग्रेजों से मधुबन को मुक्त कराने की योजना बनने के बाद क्रांतिकारियों के बाजू फड़फड़ाने लगे। कई लोगों की गिरफ्तारी ने आग में घी का कार्य किया। सोलह अगस्त को घोसी तहसील पर कब्जे की योजना को निरस्त कर पहले मधुबन थाने पर ही डीएम को पकड़ने की योजना बनी। उधर की इसकी जानकारी जब जिलाधिकारी मि. निबलेट को हुई तो वह 15 अगस्त को दिन में ही थाने पर जा पहुंचा।
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11 अगस्त को थानेदार मुक्तेश्वर सिंह द्वारा तिरंगा पैरों तले रौंदे जाने से जनता में काफी आक्रोश था। थाने पर कब्जा जमाने की सूचना ने सभी को उद्वेलित कर दिया। मधुबन थाने पर चढ़ाई के लिए फतेहपुर मंडल का जत्था परमेश्वर तिवारी, रामवृक्ष चौबे, रामनक्षत्र पाण्डेय एवं रामनयन मल्ल आदि के नेतृत्व में रवाना हुआ। इसकी एक मीटिंग डा. भगवान प्रसाद मिश्र के घर भी हुई। इस जत्थे की कार्ययोजना में यह भी शामिल था कि रास्ते में पड़ने वाली सरकारी संपत्तियों को तहस नहस भी करना है। आक्रोशित भीड़ ने रामपुर डाकखाने पर पहुंचते ही धावा बोल दिया। डाकखाने के कागजातों को इकट्ठा कर फूंक दिया गया। मकान को आग नहीं लगाई गई लेकिन भवन पर तिरंगा फहरा दिया गया। इसके बाद जत्था रामपुर पुलिस पुलिस चौकी की तरफ बढ़ा। भीड़ ने पुलिस चौकी को अपने कब्जे में किया और सरकारी कागजातों को आग लगाकर वहां भी तिरंगा फहरा दिया। कठघरा गांव में शराब और ताड़ी की दुकानें तोड़ी गई तो क्रांतिकारियों ने सरकारी बीज गोदाम पर भी दो बजे के बाद धावा बोल दिया। मवेशी खाना से मवेशी बाहर निकाल दिए गए। फतेहपुर मंडल का यह क्रांतिकारी जत्था जिलाधिकारी को ही पकड़ने के उत्साह से रास्ते में पड़ने वाले छोटे बड़े सरकारी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाते हुए राष्ट्रगीतों एवं भारत माता का जयकारा लगाते हुए आगे बढ़ गया। दिन के तीन बजते बजते फतेहपुर मंडल का जत्था थाने के निकट जा पहुंचा। इस बीच दुबारी मंडल का जत्था मंगलदेव ऋषि, रामसुंदर पांडेय, रामध्यान सिंह, रामनरायन सेठ, विश्वनाथ प्रसाद, मुवशफी आदि के नेतृत्व में पहुंचा। बीबीपुर, सूरजपुर तथा घोसी मंडल का जत्था पहुंचने से 25 हजार से अधिक की भीड़ इकट्ठा हो गई। क्रांतिकारियों का भारी जन सैलाब पहले डाकखाने पर टूट पड़ा और मनीआर्डर के रुपयों की रसीद लेकर धन पोस्टमास्टर को सौंप दिया गया और आग लगा दिए। यह देखकर थाने में बैठा डीएम मि. निबलेट और अन्य बौखला उठे लेकिन किसी ने बाहर आकर क्रांतिकारियों से आंख न मिलाई।
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