धार्मिक धरोहरों को लीलने को आतुर है घाघरा

Mau Updated Sun, 05 Aug 2012 12:00 PM IST
दोहरीघाट। घाघरा के जलस्तर में वृद्धि जारी रहने से तटवर्ती इलाके के लोगों की धड़कनें बढ़ती ही जा रही हैं। नदी के कटान का दायरा बढ़ता जा रहा है। धनौली रामपुर तथा रसूलपुर, सूरजपुर सहित विभिन्न क्षेत्रों की प्राचीन धरोहरों को नदी लीलने को आतुर दिख रही है। सब कुछ जानते हुए आला अधिकारी मौन हैं।
घाघरा के घटते बढ़ने रहने से तटवर्ती इलाके के लोगों के माथे पर चिंता की लकीरें देखी जा रही हैं। नदी के रुख को देखकर लोग चैन से सो नहीं पा रहे हैं। नदी के जलस्तर पर नजर डाला जाए तो शुक्रवार को जलस्तर 69.70 मीटर रहा। जबकि दोपहर तक घाघरा स्थिर रही। मध्याह्न बाद नदी के जलस्तर में वृद्धि शुरू हो गई। शाम तक पांच सेमी की वृद्धि दर्ज की गई। नदी 69.75 मीटर पर बह रही थी। जबकि गौरीशंकर घाट पर खतरे का निशान 69.90 मीटर आंका गया है। नदी धनौली रामपुर गांव स्थित पावरग्रिड के सामने, ब्रह्मचारी बाबा की कुटी के पास, नागा बाबा की कुटी के पास, रसूलपुर आश्रम के आश्रम के पास नदी तेजी से कटान कर रही है। धनौली रामपुर के साथ रामजानकी मंदिर तथा श्रीनाथ बाबा मंदिर, आश्रम के पास श्रवण कुमार के अंधे माता पिता के मंदिर के नदी में विलीन होने का खतरा बढ़ गया है। नदी के रुख को देखकर अन्य तटवर्ती इलाकों में भी कटान होने का खतरा बढ़ गया है। वहीं घाघरा के रौद्र रूप धारण कर लेने से नगर की ऐतिहासिक धरोहरें दुर्गा मंदिर, शाही मस्जिद, डीह बाबा का मंदिर, लोक निर्माण विभाग का डाक बंगला और मुक्तिधाम का अस्तित्व खतरे मेें दिख रहा है। वहीं नई बाजार, नौली, चिऊंटीडांड़, लामी, तारनपुर, कादीपुर, हरधौली, बहादुरपुर, सूरजपुर, बुढावर, पतनई, सरयां, ठिकरहिया, नगरीपार, रसूलपुर सहित दर्जनों गांवों के लोगों को बाढ़ का खतरा अभी से सताने लगा है।

कटान को लेकर ग्रामीणों में उबाल
फोटो
दोहरीघाट। घाघरा दशकों से कहर बरपा रही है, लेकिन शासन की ओर से कटान समस्या का समाधान न ढूंढे जाने से लोगों में आक्रोश पनप रहा है। इस संबंध में धनौली रामपुर के रामपलट राय ने कहा कि वर्षों से कटान जारी है। सैकड़ों एकड़ भूमि कटकर देवारा बन गई। 25 बीघा खेत नदी में विलीन होने से गुजर बसर करना मुश्किल रहा है। इसी तरह रामबचन राय, परमहंस राय, प्रजापति राय ने कहा कि नदी दशकों से कटान कर रही है, लेकिन शासन प्रशासन की ओर से न तो कटान पीडि़तों की सुधि लेने की जहमत तक नहीं उठायी जा सकी है और न ही कटान रोकने के उपाय ही किए जा सके हैं। सिर्फ कागजों पर ही योजना बनाई जाती है। इसी तरह जगन्नाथ राय व विवेकानंद राय ने कहा कि प्रतिवर्ष नदी धार्मिक व ऐतिहासिक धरोहरों को निशाना बना रही है। लेकिन शासन प्रशासन गंभीर नजर नहीं आ रहा है। कटान समस्या का स्थाई समाधान नहीं ढूंढा गया तो हम लोग चुप नहीं बैठेंगे।


कटान से प्रभावित रहते हैं तीन मुहल्ले
दोहरीघाट। नगर में प्रतिवर्ष कटान से नगर के तीन मुहल्ले प्रभावित रहते हैं। मल्लाह टोला, भगवान का पुरा, दलित बस्ती के लोग प्रतिवर्ष बाढ़ का दंश झेलते हैं। इन तीनों मुहल्लों में बाढ़ का पानी घुस आता है और महीनों तक जमा रहता है। जिससे लोगों का जीवन प्रभावित हो जाता है। छात्रों की पढ़ाई बंद हो जाती है। छोटे बच्चे स्कूल नहीं जा पाते हैं। काफी दिनों तक नाव चलानी पड़ती है। जलजमाव से संक्रामक बीमारियां भी फैलती हैं।


अब तक घाघरा में समा चुकी हैं दो सड़कें
दोहरीघाट। धनौली गांव के सामने आजमगढ़ राजमार्ग की दो सड़कें घाघरा में विलीन हो चुकी हैं। नदी और सड़क के बीच की दूरी मात्र 150 मीटर रह गई है। यदि सड़क नदी में विलीन हो गई तो गांव को बचाना मुश्किल होगा।


एक पाई नहीं मिला मुआवजा
दोहरीघाट। धनौली रामपुर गांव की हजारों हेक्टेयर जमीन नदी में विलीन हो चुकी है। सैकड़ों लोग भूमिहीन होकर किसी तरह जीवन यापन कर रहे हैं। मगर शासन प्रशासन की ओर से एक पाई तक नसीब नहीं हुई है।


हनुमान मंदिर से मुक्तिधाम तक हो पक्के घाट का निर्माण
दोहरीघाट। प्रसिद्ध ऐतिहासिक पौराणिक नगरी दोहरीघाट को कटान से बचाने के लिए हनुमान मंदिर से मुक्तिधाम तक 200 मीटर तक वाराणसी की तरह पक्के घाट का निर्माण किए जाने की मांग उठने लगी है। मुक्तिधाम सेवा संस्थान के प्रबंधक गुलाब चंद गुप्ता, अध्यक्ष डा. बीके श्रीवास्तव, कोषाध्यक्ष ब्रजेश गुप्ता, मनोज जायसवाल, भाजपा नेता पंकज मद्धेशिया ने वाराणसी की तर्ज पर घाट का निर्माण किए जाने की मांग की है।


प्रतिवर्ष जलमगभन हो जाती है हजारों एकड़ फसल
दोहरीघाट। घाघरा में बाढ़ आने से घाघरा के तटवर्ती इलाकों की हजारों एकड़ फसल जलमगभन हो जाती है। इससे व्यापक पैमाने पर नुकसान होता है। पशुओं के चारे की भयंकर समस्या उत्पन्न होती है। लोग पलायन करने को बाध्य हो जाते हैं।

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