आनंद सिंह ने बचाई एक दर्जन से अधिक बहनों की जान

Mau Updated Wed, 01 Aug 2012 12:00 PM IST
मऊ। किसी गरीब की जान अगर रक्त के अभाव में जा रही है तो उनका अपना खून उबलनेे लगता है। कोई फोन करके सूचना दे कि एक जरूरतमंद को खून की जरूरत है तो उनका रुख उस हास्पिटल की तरफ हो जाता है। बिना पहचान वाले मरीजों के लिए खून देकर उन्हें फख्र होता है। हम बात कर रहे हैं नगर के एक ऐसे समाजसेवी व्यक्ति की जो अब तक एक दर्जन से अधिक बहनों एवं आधा दर्जन लोगों को रक्तदान कर चुका है। आज के बदलते सामाजिक परिवेश में जब अपने खून को खून देने पर जब लोग नाक भौं सिकोड़ने लगते हैं। उसका नाम है आनंद सिंह। उन्हें कोई भी खून की जरूरत पड़ने पर फोन कर लेता है। वह खून देने से हिचकते भी नहीं है अगर तीन महीने के अंदर किसी को और खून नहीं दिया है तो।
नगर के समाजसेवी के रूप में अपनी पहचान बना चुके आनंद सिंह अब तक डेढ़ दर्जन लोगों को निशुल्क रक्तदान कर उनका जीवन बचा चुके हैं। इनमें एक दर्जन से अधिक ऐसी महिलाएं हैं जिन्हें वह जानते पहचानते भी नहीं है। ऐसी बहनों को रक्तदान कर उन्होंने एक भाई का फर्ज अदा किया है। वह बहनें भले ही रक्षाबंधन पर अपने ऐसे भाइयों को भूल जाएं लेकिन आनंद सिंह जैसे भाई बिना फिक्र किए ऐसी और बहनों के लिए अपने खून देने के लिए तत्पर रहते हैं। बातचीत में बताया कि रक्तदान देने की प्रेरणा उन्हें एक अस्पताल में खून के बिना तड़प रहे एक बच्चे से मिली। चिकित्सक यथाशीघ्र खून उपलब्ध कराने की मांग कर रहे थे और उसके अपने थे कि खून देने से भी कतरा रहे थे। उनके चेहरों पर खून देने की मायूसी देखकर आनंद सिंह का खून खौल पड़ा और बिना किसी पहचान के उन्होंने चिकित्सक से जाकर खून निकालने को कहा। शुक्र था उनका ग्रुप भी बच्चे से ऐसे मेल खा गया जैसे वह किसी जन्म के रिश्ते को लेकर इसी का इंतजार कर रहा था कि कोई तो अपना होगा इस दुनिया में उसकी जान बचाएगा। खून देने के बाद उन्होंने जब चिकित्सक से पूछा कि रक्तदान से फायदा और नुकसान क्या होता है तो चिकित्सक ने उन्हें विस्तार से समझा दिया कि एक निश्चित समय के बाद खून देने से रक्त संचार और बढ़ता है और उसकी भरपाई तेजी से होने लगती है। बताया कि ईश्वर ने उन्हें 18 लोगों को खून देने के बाद भी शरीर में इतना खून दिया है कि जब भी वह इसकी जांच कराते हैं तो सामान्य से अधिक उनके शरीर में खून रहता है। कभी कभी वह जब जल्द ही किसी व्यक्ति को खून दिए होते हैं तो उन्हें पछताना पड़ता है कि किसी जरुरतमंद की मदद नहीं कर सके। इसके बाद उन्होंने कई लोगाें को इसके लिए प्रेरित किया जो खून की किसी व्यक्ति को जरुरत पड़ने पर उसकी मदद कर सकें। आज उनके पास ऐसे लोगों की संख्या आधा दर्जन से अधिक हो गई है। भविष्य में वह ऐसे व्यक्तियों का एक ग्रुप बनाकर इस नेक कार्य को निशुल्क कराने के लिए अपनी वेबसाइट खोलने की भी इच्छा रहते हैं। कहते हैं बिना पहचान वाले जरुरतमंद को खून देकर जिंदगी बचाना सबसे बड़ा महादान है।

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