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देशी नस्ल की गायों में सुधार से बढ़ सकता है उत्पादन

Mau Updated Sat, 21 Jul 2012 12:00 PM IST
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मऊ। कहते हैं भारत में कभी दूध की नदियां बहती थी। पशुपालन के प्रति भारत के लोग इतने जागरूक थे कि उनका यही प्रमुख व्यवसाय था। लेकिन आज जनपद में दुग्ध उत्पादन कम होने से लोगों को अपेक्षा के अनुरूप दूध नहीं मिल पा रहा है। पशु वैज्ञानिकों के अनुसार देशी गायों की नस्ल सुधार दिया जाए तो एक बार फिर से दूध की नदियां बहाई जा सकती हैं। इससे पशुपालकों की आर्थिक स्थिति भी सुधर सकती है। दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के लिए पशुपालन विभाग की ओर से तमाम योजनाएं संचालित की जा रही हैं। लेकिन जागरूकता कार्यक्रम के अभाव में योजनाएं कागजों में ही सिमट कर रह जा रही हैं।
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जनपद की आबादी लगभग 22 लाख से भी अधिक है। मांग के अनुरूप प्रति व्यक्ति को शुद्ध दूध नहीं मिल पा रहा है। गांवों में आज भी काफी संख्या में पशुपालक देशी गायों का ही पालन कर रहे हैं। वैज्ञानिक विधि से पशुपालन न करने से अपेक्षा के अनुरूप दुग्ध उत्पादन नहीं कर पा रहे हैं। आंकड़ों पर नजर डाला जाए तो जनपद में देशी गायों की संख्या एक लाख 95 हजार 116 है। पशु वैज्ञानिकों के अनुसार देशी गायों की नस्ल सुधार दिया जाए तो दुग्ध उत्पादन को बढ़ाया जा सकता है। नस्ल सुधार के लिए विशेषज्ञों की देखरेख में क्रास ब्रीडिंग कराई जाती है। किसी दुधारू गाय से ब्रीडिंग कराने पर जो बछिया पैदा होती है उसमें दोनों के आधे-आधे गुण आ जाते हैं। यानि पैदा होने वाली बछिया से लगभग ढाई गुना अधिक दूध प्राप्त किया जा सकता है। जर्सी होलस्टीन फ्रीजियन जो 40 लीटर तक दूध देती है। यदि इस गाय के साड़ से ढाई लीटर दूध देने वाली देशी गाय की क्रास ब्रीडिंग करायी जाती है तो पैदा होने वाली बछिया 21 लीटर दूध देगी। लेकिन वह छह से सात पीढ़ी बाद होगा। इस संबंध में कृषि विज्ञान केंद्र पिलखी के पशु वैज्ञानिक डा. विनय कुमार सिंह का कहना है कि वैज्ञानिक विधि से पशुपालन करने पर दूध का उत्पादन बढ़ाया जा सकता है। क्रास ब्रीडिग प्रोग्राम के तहत दुधारू पशुओं की नस्ल सुधार कर दूध उत्पादन बढ़ा सकते हैं।


मऊ। पशुपालन विभाग की ओर से 29 पशु अस्पताल केंद्र और 37 पशुधन प्रसार केंद्र की स्थापना की गई है। सभी पशु अस्पतालों पर क्रास ब्रीडिंग प्रोग्राम संचालित है। लेकिन महकमे की ओर से व्यापक पैमाने पर जागरूकता कार्यक्रम न चलाए जाने से अधिकांश पशुपालक इस योजना का लाभ नहीं उठा पा रहे हैं। पशु अस्पतालों पर प्रत्येक पशु की क्रास ब्रीडिंग कराने पर पशुपालक को मात्र 30 रुपये जमा करने पड़ते हैं। इस बावत मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डा. यूपी सिंह का कहना है कि गोष्ठी तथा अन्य कार्यक्रमों के माध्यम से पशुपालकों को जागरूक किया जाता है।


निरीक्षण में बंद मिला पशु अस्पताल
मऊ। उप निदेशक पशुपालन डा. अंगद उपाध्याय ने शुक्रवार को चिरैयाकोट पशु अस्पताल का निरीक्षण किया। इस दौरान अस्पताल बंद मिला। चिकित्सक की खबर लेने जब वह एक गांव में पहुंचे तो वह अकेले ही टीकाकरण का कार्य कर रहे थे। पशु अस्पताल के बंद रहने के बावत पूछे जाने पर उन्होंने बताया कि चपरासी के जिम्मे अस्पताल खुला छोड़कर वह विभागीय कार्य पर आए थे। चपरासी की इस लापरवाही पर उन्होंने कार्रवाई करने का निर्देश दिया।

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