जलाभिषेक को सावन का इंतजार नहीं करते

Mau Updated Tue, 17 Jul 2012 12:00 PM IST
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मऊ (ब्यूरो)। सदियों से आस्था का केंद्र बने कोपागंज के दक्षिण-पश्चिम में स्थित नौसेमरघाट में तमसा नदी के किनारे स्थापित बारहदुअरिया शिव मंदिर की महत्ता शिवभक्तों के लिए काशी विश्वनाथ से कम नहीं है। शिव की विशेष कृपा के चमत्कारों ने इस मंदिर की सेवा में कुछ ऐसे भक्त दिये हैं जो कई किलोमीटर का सफर कर बाबा का प्रतिदिन जलाभिषेक करने आते हैं। घाघरा की प्राचीन धाराओं के सानिध्य में बने इस मंदिर में शिवलिंग का जलाभिषेक करने के लिए भक्त सावन के सोमवार का इंतजार नहीं करते। मंदिर में आध्यात्मिक गतिविधियां हर-हर महादेव के उद्घोष के साथ वर्ष भर चलती हैं।
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घाघरा नदी के दक्षिणी तट तक जनपद का क्षेत्र कभी प्राचीन काशी राज्य का हिस्सा माना जाता था। पूरे क्षेत्र में बाबा के भक्तों की अच्छी खासी तादाद थी तो शिव के मंदिर भी गांव-गांव में बने। केवल कोपागंज ब्लाकखंड की बात करें तो यहां भगवान भोलेनाथ के 120 से ज्यादा मंदिर हैं। अपनी आध्यात्मिक, ऐतिहासिक और पौराणिक मान्यताओं के चलते कोपागंज के गौरीशंकर मंदिर और बारहदुअरिया शिव मंदिर ने आस्था का एक नया ही रंग दिया है। कहते हैं कि यहां मन्नत मांगों तो तत्काल पूरी होती है। बारहदुअरिया शिव मंदिर का आलम यह है कि कई भक्त तो यहां बाबा के जलाभिषेक के लिए प्रतिदिन आते हैं। सावन के सोमवार को काछीकला, कोइरिया पार, भांवरकोल, हिकमा, भदसा मानोपुर से भक्तों का समूह भोर में मंदिर की ओर चल देता है।
बाबा के दर्शन और जलाभिषेक के बाद ही भक्त अन्न जल ग्रहण करते हैं।
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