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सोशल आडिट के प्रति कई पंचायत बेपरवाह

Mau Updated Sun, 15 Jul 2012 12:00 PM IST
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मऊ। महात्मा गांधी ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना को गांव स्तर पर और सशक्त करने एवं लोगों की जन जागरूकता के साथ कार्यों का स्थलीय निरीक्षण करने के लिए बनाया गया सोशल आडिट कार्य गैर जिम्मेदारी के साथ हो रहा है। हाल यह है कि ग्राम पंचायतों में सोशल आडिट के दौरान न तो कोई कर्मचारी मिल रहा है और न ही मनरेगा के कार्यों के लिए लगाए गए रोजगार सेवक। ग्राम प्रधानों की भी भूमिका सोशल आडिट के प्रति सहयोगात्मक नहीं है। पिछले तीन महीने में 30 ग्राम पंचायतें मिली हैं जहां सोशल आडिट का समय पूर्व से निर्धारित होने के बाद भी मौके पर कोई व्यक्ति इसकी न तो जानकारी देने वाला मिला और न ही किसी कार्य को दिखाने की किसी ने कोई जरूरत समझी। जिले की 30 ऐसी ग्राम पंचातयों की इस लापरवाही की रिपोर्ट शासन को भेजी गई है।
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महात्मा गांधी ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत ग्राम पंचायतों में होने वाले कार्य की सोशल आडिट कराए जाने पर भारत सरकार का विशेष जोर है। सोशल आडिट के दौरान ग्राम पंचायतों में होने वाले कार्यों का स्थलीय निरीक्षण के साथ ही साथ जाब कार्ड धारकों के किए गए कार्यों का मस्टरोल आदि देखकर उन्हें उसके प्रति जागरूक किया जाना है। साथ ही गांव में मनरेगा के प्रति होने वाले कार्य के प्रति भी लोगों को जागरूक करना है कि कोई भी व्यक्ति कार्यों का किस प्रकार लेखा जोखा ले सकता है और कार्यों में कमी पाए जाने पर कहां किससे शिकायत कर सकता है। इस संबंध में जिला कोआर्डिनेटर मनरेगा शकुंतला का कहना है कि चार महीने में 30 गांव ऐसे मिले हैं जहां जाने के बाद कोई भी ग्राम पंचायत अधिकारी, रोजगार सेवक या प्रधान नहीं मिला है। इसके चलते सोशल आडिट में काफी परेशानी आ रही है। गांवों में लापरवाही मिलने की ब्लाकवार रिपोर्ट शासन को भेजी गई है।


इन 30 ग्राम पंचायतों में बरती जा रही उदासीनता
मऊ। वर्ष 2012-13 में पूर्व से निर्धारित समय पर सोशल आडिट के दौरान दोहरीघाट ब्लाक के दरगाह, खड़िया, बीबीपुर, करौदा नरायनपुर व जमुनीपुर में पांच अप्रैल से जुलाई में हुए निरीक्षण के दौरान कोई भी नहीं मिला। परदहां ब्लाक के परदहां गांव, ठकुरमनपुर, रकौली, डुमरांव, सरवां गांव में भी सोशल आडिट के दौरान मौके पर कोई नहीं मिला। सबसे बुरा हाल रानीपुर ब्लाक का है। यहां अकबरपुर, अलीनगर, अमीरहा, अस्सीभवन और बड़ागांव में कोई निश्चित तिथि पर जानकारी देने वाला नहीं मिला। घोसी में बीबीपुर, अरियासो, तराईडीह व मुहम्मदाबाद गोहना में दतौली, बंदीघाट, नरौली, शमसाबाद का भी वहीं हाल रहा। वहीं रतनपुरा ब्लाक के बिलौझा, तरवांडीह कोपागंज के लाडनपुर, तिघरा, भेलाबांध और लैरो बेरुवार में भी कोई नहीं मिला। फतेहपुर मंडाव में काठ तरांव, तिघरा गांव में भी सोशल आडिट के प्रति उदासीनता का मामला प्रकाश में आया है।

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