उच्च शिक्षा एवं शोध अधिनियम बिल को लेकर अधिवक्ताओं में उबाल

Mau Updated Thu, 12 Jul 2012 12:00 PM IST
मऊ। उच्च शिक्षा एवं शोध अधिनियम बिल के विरोध में बार कौंसिल आफ इंडिया के आह्वान पर जिले के अधिवक्तओं ने बुधवार को जमकर विरोध प्रदर्शन किया। अधिवक्ताओं ने विरोध स्वरुप पूरे दिन न्यायिक कार्य से खुद को विरत रखा। साथ ही प्रस्तावित बिल और विधि मंत्री का पूतला फूंका और जमकर नारेबाजी किया।
सिविल कोर्ट सेंट्रल बार एसोसिएशन की बैठक बुधवार को संघ के पुस्तकालय भवन में हुई। इसमें उच्च शिक्षा एवं शोध अधिनियम बिल के विरोध में बार कौंसिल आफ इंडिया के आह्वान का समर्थन करने का निर्णय लिया गया। बार के अध्यक्ष राजेंद्र राय ने अधिवक्ताओं की राय लेने के बाद बिल के विरोध में पूरे दिन न्यायिक कार्य से विरत रहने का निर्णय लिया गया। संचालन महामंत्री रामकृत यादव ने किया। इसके बाद अधिवक्ता अध्यक्ष एवं महामंत्री के नेतृत्व में जूलूस निकाल कर नारेबाजी किए और विधिमंत्री का पूतला तथा प्रस्तावित बिल की प्रति फूंके। इस मौके पर लालजी पांडेय, अमरनाथ सिंह,मानसिंह यादव, दिनेश प्रताप सिंह, राकेश मिश्रा, रामनेरश यादव, इफ्तेखार अहमद, शिवप्रसाद श्रीवास्तव, सज्जाद हुसैन, लक्ष्मीकांत यादव, राजेश सिंह राज, प्रमोद साहनी, अरविंद तिवारी, सतीश मौर्य, अजय सिंह, सूर्यनाथ यादव, अनिल राय, मनोज पांडेय,आदि लोग मौजूद रहे। उधर, तहसील सदर बार एसोसिएशन के अधिवक्ताओं ने प्रस्तावित बिल के विरोध में तहसील परिसर में धरना दिया। साथ ही विधिमंत्री के कृत्यों की निंदा करते हुए उनका पूतला फूका। इस मौके पर राजेंद्र चौहान, ओमप्रकाश त्रिपाठी, सुशील राय, हरिकेश सिंह, अजीत श्रीवास्तव, बद्रीनाथ सिंह, रामप्रकाश तिवारी, अजय कुमार सिंह, अखिलानंद सिंह, ईश्वरचंद त्रिपाठी, रविंद्र उपाध्याय, सत्यप्रकाश सिंह, पीएन सिंह आदि लोग उपस्थित रहे। डिस्ट्रिक्ट बार एसोसिएशन की बैठक संघ के अध्यक्ष रविंद्रनाथ उपाध्याय की अध्यक्षता में हुई। इसमें बार कौंसिल के आवाह्न पर प्रस्तावित बिल का विरोध करते हुए पूरे दिन न्यायिक कार्य से विरत रहे। संचालन मंत्री सुरेंद्र सिंह ने किया।
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प्रस्तावित बिल का विरोध क्यों
मऊ। उत्तर प्रदेश बार कौंसिल के अध्यक्ष इमरान माबूद खां ने दूरभाष पर अमर उजाला को बताया कि उच्च शिक्षा एवं शोध अधिनियम का विरोध इस लिए किया जा रहां है कि यह बिल पूरी तरह से अधिवक्त ा हितों के विरुद्ध है। उन्हाेंने बताया कि भारत सरकार इस बिल के माध्यम से विधिक शिक्षा एवं विधिक संस्थानों को अपने हाथ में लेना चाहती है। दूसरा यह कि अधिवक्ता हितों का ख्याल न रखकर विदेशी अधिवक्ताओं को भारत आने और उनको सुविधा प्रदान करने जा रही है। तीसरा यह कि अधिवक्ताओं के विरुद्ध की गई शिकायतों के लिए खुद पैनल बनाकर सुनवाई करना चाहती है। जब कि यह अधिकार बार कौंसिल के पास है। आगे बताया कि उपरोक्त बातों को लेकर अधिवक्ता हितों का ध्यान रखकर भारत सरकार के प्रस्तावित इस बिल का विरोध किया जा रहा है।
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हड़ताल के चलते परेशान रहे वादकारी
मऊ। अधिवक्ताओं के हड़ताल के चलते जिले के विभिन्न अंचलों से न्याय की आशा लेकर कचहरी आए वादकारियों को काफी परेशान का सामना करना पड़ा। हड़ताल के कारण उनके मामले में कोई कार्यवाही नहीं हो सकी। वादकारी अपनी पत्रावलियों में अगली तिथि लेकर वापस घर चले गए। जिसके चलते दोपहर बाद कचहरी परिसर में पूरी तरह संनाटा छा गया।

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