शिखर से सिफर तक पहुंचे तीन पूर्व नगर अध्यक्ष

Mau Updated Mon, 09 Jul 2012 12:00 PM IST
मुहम्मदाबाद गोहना। नगर पंचायत चुनाव परिणाम आने के बाद एक तरफ जहां राजनीति में सिफर से सफर करने वालीं नवनिर्वाचित अध्यक्षा जरीना खातून को मतदाताओं ने हाथों हाथ लेकर शिखर पर पहुंचा दिया है। दूसरी तरफ तीन पूर्व नगर पंचायत अध्यक्षों को शिखर से सिफर तक उतार दिया है।
मौजूदा चुनाव में एक दो नहीं बल्कि तीन-तीन पूर्व नगर अध्यक्ष अपनी किस्मत आजमा रहे थे लेकिन परिणाम आने के बाद उनके मंसूबों पर पानी फिर गया है। पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष बिंध्याचल सोनकर, दो बार अध्यक्ष रह चुके कन्हैयालाल सेठ और निवर्तमान अध्यक्ष लालजी वर्मा इस चुनाव में अपनी पत्नियों के माध्यम से एक बार फिर अध्यक्ष की कुर्सी पर काबिज होने का मंसूबा पाल रखे थे। लेकिन परिणाम आने के बाद इन तीनों पूर्व अध्यक्षों का सपना धूल-धूसरित हो गया है। हालांकि लालजी वर्मा की पत्नी मीरा वर्मा ने काफी हद तक संघर्ष करते हुए निर्वाचित अध्यक्ष को कड़ी चुनौती दी थी और वह दूसरे नंबर पर रहीं। लेकिन पूर्व नगर अध्यक्ष कन्हैयालाल सेठ चुनाव में चौथे नंबर पर खिसक गए। पूर्व अध्यक्ष विंध्याचल सोनकर की हालत सबसे खराब रही और उनकी पत्नी मात्र 253 मत पाकर नौवें स्थान पर खिसक र्गइं। इस बार मतदाताओं ने अपना जायका बदलते हुए राजनीति में बिल्कुल सिफर रहने वाली जरीना खातून को समर्थन देते हुए उन्हें अध्यक्ष की कुर्सी पर काबिज करा दिया है। शायद इसी लिए राजनीति को किसी के हिस्से की जागीर न बताने वाले राजनीतिज्ञों की कहावत अक्षरश: सच साबित हुई है।
इनसेट
इस बार बढ़ गया अवैध मत
मुहम्मदाबादगोहना। एक तरफ जहां समाज में शिक्षा का स्तर ऊंचा होने की बात कही जा रही है। दूसरी तरफ कई ऐसे परिणामों से उक्त कहावतों को झूठा भी साबित होना पड़ रहा है। निकाय चुनाव में रद्द हुए मतपत्र की संख्या को देखकर यह साबित हो रहा है कि अभी भी समाज में शिक्षा का कितना अभाव है। मुहम्मदाबादगोहना नगर निकाय चुनाव में कुल पड़े 17413 मतों में से 1635 मतों को अवैध घोषित किया गया है और यह कुल पड़े मतों का लगभग नौ प्रतिशत है। नगर पंचायत अध्यक्ष के मतों की गिनती के दौरान कुल 840 मत ऐसे प्राप्त हुए जिस पर मुहर की जगह अंगूठा अथवा सादा छोड़ दिया गया था। इसी तरह सभासदों के गिनती के दौरान 795 मत ऐसे प्राप्त हुए जिनके ऊपर मुहर नहीं लगायी गई थी। इस तरह कुल 1635 मत या तो बिना मुहर के या फिर अंगूठा लगाकर मतपेटिका में डाले गए थे। अवैध मतों के पिछले रिकार्ड को देखा जाए तो विगत 2006 के निकाय चुनाव में अवैध मतों की संख्या मात्र छह प्रतिशत थी जो इस साल बढ़कर नौ प्रतिशत हो गई।

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