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समय से पहले ही खराब हो जा रही दवा

Mau Updated Sat, 07 Jul 2012 12:00 PM IST
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रतनपुरा। स्थानीय ब्लाक मुख्यालय पर स्थापित राजकीय पशु चिकित्सालय बदहाल पड़ा है। यहां सुविधाओं का अभाव है। लाखों की लागत से बना पशु अस्पताल का भवन लोकार्पण की बाट जोह रहा है। जबकि जर्जर भवन में पशु अस्पताल का संचालन हो रहा है। उचित रख-रखाव के अभाव में दवाएं समय से पहले ही एक्सपायर हो जाती है। जबकि आठ पशुधन प्रसार केंद्रों पर पशुधन प्रसार अधिकारियों का पद रिक्त चल रहा है। पशुओं का इलाज सही ढंग से न होने से पशु असमय ही काल के गाल में समा जा रहे हैं। इससे दूध उत्पादन पर असर पड़ रहा है। पशुपालकों की शिकायत के बाद भी महकमे की ओर से मामले को गंभीरता से नहीं लिया जा सका है।
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रतनपुरा ब्लाक की आबादी लगभग दो लाख है। पशुपालन विभाग की ओर से स्थानीय मुख्यालय पर राजकीय पशु अस्पताल की स्थापना की गई है। इसके अलावा पांच पशु अस्पताल सहित आठ पशुधन प्रसार केंद्रों की स्थापना की गई है। महकमे की ओर से ब्लाक मुख्यालय पर लाखों की लागत से आधुनिक सुविधाओं से युक्त अस्पताल का भवन बनाया गया। भवन पूर्ण रूप से बन जाने के वर्षों बाद भी हैंडओवर नहीं किया जा सका है। विभागीय उदासीनता की स्थिति यह है कि जर्जर भवन में पशु अस्पताल का संचालन हो रहा है। बिजली की व्यवस्था तक नहीं है। जर्जर भवन के गिरने का खतरा बना रहता है। दवाओं का उचित रख-रखाव नहीं हो पा रहा है। पशुओं के लिए एंटीबायोटिक दवाओं का अकाल ही रहता है। क्षेत्र के कंसो, हलधरपुर, बिलौझा, गुलौरी, पहसा, भीमहर, अरदौना, मखना स्थित पशुधन प्रसार केंद्रों पर पशुधन प्रसार अधिकारियों का पद रिक्त होने से पशुओं का इलाज भगवान भरोसे हो रहा है। पशु अस्पतालों पर पर उन्नतिशील नस्ल के सांड़, भैंसा की व्यवस्था तक नहीं है। पशुओं के टीकाकरण का काम भी कागज पर हो रहा है। कुल मिलाकर पशुपालन विभाग की ओर से कागज पर ही व्यवस्था का संचालन हो रहा है। इस बाबत राजकीय पशु अस्पताल के पशु चिकित्साधिकारी रामअशीष सिंह का कहना है कि मुख्य पशु चिकित्साधिकारी को पत्र लिखा गया है।
इनसेट
क्या कहते हैं पशुपालक
रतनपुरा। स्थानीय ब्लाक मुख्यालय सहित क्षेत्र के विभिन्न इलाकों में स्थापित राजकीय पशु अस्पतालों पर सुविधाएं न मिलने से पशुपालकों में आक्रोश पनप रहा है। इस संबंध में क्षेत्र के बब्बन सिंह, जगदीश मौर्य, तेज प्रताप सिंह, रामनरायन मिश्र, भरत यादव, अजीत मौर्य अमृत यादव का कहना है कि पशुधन प्रसार अधिकारियों का पद रिक्त रहने तथा पशु अस्पतालों पर सुविधाओं का लाभ न मिल पाने से पशुओं का इलाज सही ढंग से नहीं हो पा रहा है। पशु असमय से काल के गाल में समा जा रहे हैं। इससे दूध उत्पादन पर असर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि सुविधाओं को बहाल नहीं किया गया तो हम लोग आंदोलन करने के लिए बाध्य हो जाएंगे।
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