ऐन वक्त पर अरशद जमाल को दिया था झटका

Mau Updated Sat, 23 Jun 2012 12:00 PM IST
मऊ। नगरपालिका चुनाव में पिछले एक दशक से राजनीति की धूरी माने जाने वाले पूर्व चेयरमैन अरशद जमाल एवं निवर्तमान चेयरमैन मुहम्मद तैयब पालकी के बीच चल रही सियासी जंग अब उनके बीबियों तक जा पहुंची है। समाजवादी पार्टी ने पिछले चुनाव में तो पूर्व चेयरमैन अरशद जमाल से सिंबल छीनकर तैयब पालकी को दे दिया था, लेकिन इस बार वह अपने हाथ खड़े किए हुए है। अधिकृत प्रत्याशी बनने के लिए दोनों नेताओं के समर्थकों में जोर आजमाइश और हाथापाई भी हो चुकी है, लेकिन दोनों ही निर्दल सपा का अधिकृत प्रत्याशी बनके बीवियों को ताज दिलाना चाहते हैं।
नगरपालिका में दो लाख से अधिक मतदाताओं का नेतृत्व को लेकर पिछले एक दशक से पूर्व चेयरमैन अरशद जमाल और मुहम्मद तैयब पालकी के बीच सियासत की जंग चलती आ रही है। खास बात यह है कि दोनों ही नेता अपने को सपाई बनकर राजनीति करते हैं। हालांकि इस बीच कांट झांट के चलते कुछ दिनों तक मुहम्मद तैयब पालकी को पार्टी से बाहर का भी रास्ता देखने को मिल चुका है लेकिन एक बार फिर वह सपा की जिला कार्य कार्यकारिणी में जिला महासचिव के पद भी पहुंच चुके हैं। समाजवादी पार्टी दोनों नेताओं की नगरपालिका में पकड़ होने के चलते नहीं छोड़ना चाहती है। यही कारण है कि आज इन दोनों नेताओं को लेकर पार्टी दो खेमों में भी बंटती नजर आ रही है।
नगरपालिका की राजनीति के दोनों माहिर खिलाड़ियों की सियासी जंग आज नई नहीं, बल्कि यह पिछले एक दशक से है। वर्ष 2000 में अरशद जमाल के चेयरमैन बनने के बाद तैयब पालकी ने पूरे पांच साल तक न सिर्फ विरोध जताया था, बल्कि वर्ष 2006 के चुनाव में वह मुख्तार अंसारी के रहमोकरम पर ऐन वक्त पर सपा का सिंबल भी झटक लिए। वर्ष 2006 में अपने कार्यों के बल पर पूर्व चेयरमैन अरशद जमाल ने समाजवादी पार्टी से नामांकन दाखिल किया था। वह सपा से सिंबल को लेकर पूरी तरह से आश्वस्त थे, लेकिन ऐन वक्त पर सिंबल न दिए जाने से अरशद जमाल चुनाव नहीं लड़ पाए। तैयब पालकी को सपा का सिंबल मिला और वह चेयरमैन बन बैठे। इस बीच अरशद जमाल को पार्टी ने संतुष्ट करने के लिए पार्टी का जिलाध्यक्ष बनाया। अपने जिलाध्यक्ष के कार्यकाल में अरशद जमाल ने ऐसी सियासी चाल चली कि तैयब पालकी को पार्टी से बाहर का रास्ता देखना पड़ा। उधर मुख्तार अंसारी की भी सपा से दूरी बढ़ गई। विधानसभा चुनाव में तैयब पालकी एक बार फिर सपा का दामन थामने में कामयाब हो गए और मुख्तार अंसारी को दर किनार कर सपा का ही साथ दिया। मुख्तार अंसारी की जीत के बाद वह सपा से सिंबल को लेकर संघर्ष करते रहे, लेकिन पार्टी द्वारा सिंबल न दिए जाने पर वह अपनी पत्नी रजिया सुल्ताना को अधिकृत प्रत्याशी बनने को लेकर अरशद जमाल से पार्टी कार्यालय पर भिड़े। दोनों नेताओं की सियासी जंग नगरपालिका की महिला सीट होने के चलते उनके बीवियों तक जा पहुंची है।

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