चार प्राइमरी स्कूलों का अस्तित्व खत्म

Mau Updated Sat, 23 Jun 2012 12:00 PM IST
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मऊ। करोड़ों खर्च करके बच्चों को स्कूल पहुंचाने के लिए प्रयास मेें जुटे शिक्षा विभाग को शहरी गरीब बच्चोें की फ्रिक तक नहीं है। शहर में किराए के मकान मेें चल रहे चार प्राइमरी स्कूलों को मकान मालिकों द्वारा खाली करा लेनेे के बाद से दो साल से इन स्कूलों के लिए जमीन तक उपलब्ध नहीं हो पाई। ऐसे में इन स्थानोें के बच्चे ककहरा सीखने तक के लिए तरस जा रहे है। शिक्षा विभाग चुप्पी साध कर जमीन के लिए पालिका से गुहार लगा रहा है। उधर, नगर के ही अन्य दो प्राइमरी स्कूलोें के भवन जर्जर हो चले हैं।
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बच्चों को अधिक से अधिक स्कूलों में दाखिला दिलाने के लिए बेसिक शिक्षा विभाग स्कूल चलो अभियान के तहत तैयारी मेें जुटा है। लेकिन शहर में गरीब परिवारों के बच्चों के लिए विभाग को फिक्र ही नहीं हैै। ऐसे में स्कू ल चलो अभियान को कितनी सफलता मिलेगी इसका जायजा आसानी से लगाया जा सकता है। शहर के चार प्राइमरी स्कूल छत्तनपुरा, हुसैनपुरा, बाजार मंडी और पहाड़पुरा किराए के मकान में संचालित हो रहे थे। लेकिन दो साल से यहां पर मकान खाली कराए जाने से इन स्कूलों का अस्तित्व ही समाप्त हो गया है। यहां पर बुनकरोें के बच्चे ककहरा सीखने को मोहताज हो चले हैं। गरीब होने के चलते निजी स्कूलों में दाखिला तक नहीं ले पाते। लेकिन शिक्षा विभाग के द्वारा इन बच्चों के लिए अभी तक कोई उपाय नहीं किए जा सके हैं। यहां के इस्लाम का कहना है कि वे इतने सामर्थ्यवान नहीं है कि अपने बच्चोें को प्राइवेट स्कूल में भेज सके। पास के जो स्कूल हैं भी वह काफी दूरी पर हैं। अरशद का कहना है कि बच्चों की पढ़ाई को लेकर काफी परेशान हैं।
उधर दो प्राइमरी स्कूल मुंशीपुरा बालक और मलिकताहिर पुरा केे भवन जर्जर हो चले हैं। इन स्कूलों में बच्चे जान हथेली पर रखकर पढ़ने को मजबूर होंगे। पूछे जाने पर जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी मनोहर प्रसाद का कहना है कि नगर पालिका से स्कूलों के लिए जमीन की मांग की जा चुकी है। लेकिन जमीन की उपलब्धता नहीं होने से स्कूलों का निर्माण कार्य नहीं हो सका है। ऐसे में जो विद्यालय बंद हो गए हैं। उन स्थानों के बच्चाें के लिए पास के स्कूलोें में दाखिला दिलाया जाएगा। हालांकि जमीन के लिए प्रयास जारी है। नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी विद्यासागर का कहना है कि अभी उनके संज्ञान मेें मामला नहीं है। यदि शिक्षा विभाग के द्वारा जमीन की मांग की गई होगी तो स्कूलों के लिए जमीन की व्यवस्था कराई जाएगी। यदि जमीन उन स्थानोें पर नहीं होगी तो पास के स्थानोें पर जहां उपलब्ध होगी दिलाया जाएगा।
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