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सीएचसी व पीएचसी में जेनरेटर न चलने से हलाकान हैं मरीज

Mau Updated Tue, 12 Jun 2012 12:00 PM IST
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मऊ। सत्ता परिवर्तन के बाद भी ग्रामीण क्षेत्रों मेें स्थापित सरकारी अस्पतालों में प्रदत्त सुविधा का लाभ मरीजों को मिलता नजर नहीं आ रहा है। नगर सहित जिले के विभिन्न इलाकों मेें अघोषित बिजली कटौती से लोगों की मुश्किलें बढ़ती जा रही है। स्वास्थ्य महकमे की ओर से अस्पतालों में रख रखाव सही ढंग से न होने से मरीजों को एक-एक पल बिताना भारी पड़ रहा है। अधिकतर प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में जनरेटर कम क्षमता का लगा है। जबकि नए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्राें में जनरेटर की सुविधा ही नहीं है। बिजली गुल होते ही जनरेटर का संचालन कभी कभार ही किया जा रहा है। आला अधिकारी बजट का रोना रहे हैं।
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जिले के विभिन्न ब्लाकों मेें छह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, तीन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र तथा 36 नए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र संचालित हैं। शासन की ओर से मरीजों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए सामुदायिक तथा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में जनरेटर की सुविधा प्रदान की गई है। हालत यह है कि अघोषित बिजली कटौती से मरीजों को तमाम समस्याओं से जूझना पड़ रहा है। सबसे अधिक परेशानी गंभीर बीमारी से ग्रसित मरीजों की हालत बिगड़ने लग जा रही है। कोपागंज संवाददाता के अनुसार स्थानीय कस्बा स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में पांच केवीए का जनरेटर लगा है जो जीवनरक्षक दवाओं को कूल करने के लिए ही चलाया जाता है। बिजली गुल होते ही मरीजों को पंखा झेलना पड़ता है। मुहम्मदाबादगोहना स्थानीय कस्बा स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में मरीजों का इलाज भगवान भरोसे हो रहा है। बिजली गुल होते ही मरीजों व तिमारदारों को असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। अस्पताल में रखा जनरेटर शो पीस बनकर रह गया है।
अमिला संवाददाता के अनुसार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बड़रांव में कम क्षमता का जनरेटर लगा है। बिजली गुल होने पर कभी कभार चलता है। बिजली गुल होते ही अस्पताल में भर्ती तथा ओपीडी के मरीजों को कुछ देर बिताना भारी पड़ रहा है। घोसी/हलधरपुर संवाददाता के अनुसार बिजली कटौती से लोगों का बुरा हाल है। बिजली गुल होने की स्थिति में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र घोसी तथा रतनपुरा में इमरजेंसी में ही जनरेटर चलाया जाता है। जबकि कागज पर ज्यादा ही खर्च दिखाया जाता है। उधर, मुख्य चिकित्साधिकारी डा. प्रभाकर पांडेय का कहना है कि शासन से बजट नहीं मिला है। अस्पताल के संसाधन से जनरेटर का संचालन होना है। धन की कमी से समस्या आ रही है।

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