डाक्टर की लापरवाही से बंदी की मौत

Mau Updated Thu, 07 Jun 2012 12:00 PM IST
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मऊ। जिला कारागार में दहेज हत्या की सजा काट रहे बंदी की तबियत खराब होने से मंगलवार की देर रात जिला अस्पताल ले जाते समय रास्ते में ही उसकी मौत हो गई। मामला संज्ञान में आते ही जहां एक ओर जिले के आलाधिकारियों के होश उड़ गए। वहीं दूसरी ओर बंदी की मौत से जेल में व्याप्त तनाव को जानने और जेलर की सूचना के बावजूद साढ़े तीन घंटे बाद जिला पुलिस और पीएसी मौके पर पहुंची। गौरतलब है कि मंगलवार को ही जिला अस्पताल की तीन डाक्टरों की टीम ने जिला जेल आकर मरीजों का स्वास्थ्य परीक्षण किया था और उन्हें एक भी बंदी गंभीर बीमारी से पीडि़त नहीं मिला था। घटना को लेकर जेलर ने स्पष्ट तौर पर जेल के लिए नियुक्त स्थाई डाक्टर की कार्यप्रणाली को जिम्मेदार ठहराया है। बंदी की मौत से अन्य बंदियों में काफी आक्रोश है। वहीं किसी अनहोनी से निपटने के लिए भारी मात्रा में फोर्स की भी तैनाती जिला प्रशासन द्वारा कर दी गई है।
मिली जानकारी के आधार पर, दोहरीघाट थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्रामसभा गोंठा निवासी अनिल कुमार राय (42) पुत्र मथुरा राय पर अपनी पत्नी पिंकी राय की दहेज के लिए हत्या करने का अपराध सिद्ध होने पर वर्ष 2009 से जिला कारागार में सजा काट रहा था। वह यहां भंडारी का कार्य करता था। मंगलवार को उसकी तबियत सही न होने पर बंदीरक्षकों को सूचना देकर वह काम पर नहीं आया। उसे डाक्टरों को दिखाया गया। शाम में तबियत फिर खराब हुई तो जेल के लिए नियुक्त स्थायी डाक्टर मो. ताहिर खान और अस्थायी डाक्टर राजेश राय से संपर्क किया गया। लेकिन वह न मिले और न ही जेलर का फोन उठाया। किसी तरह से फार्मासिस्ट ने स्थिति पर नियंत्रण किया। इसी बीच रात के तीन बजे बंदी अनिल के पेट में फिर भीषण दर्द उठा। कुछ इंतजाम न होने पर आननफानन में बंदीरक्षक उसे जिला अस्पताल को लेकर रवाना हुए। लेकिन अस्पताल पहुंचने से पहले ही उसकी मौत हो गई। घटना की जानकारी मिलते ही जेल प्रशासन के होश उड़ गए। फौरन मामले से जिले के उच्चाधिकारियों को अवगत कराया गया। लेकिन जिला प्रशासन और पुलिस की लापरवाही का आलम यह रहा कि संवेदनशील मामला होने के बावजूद सुरक्षा के लिए जिला पुलिस सुबह साढ़े आठ बजे के बाद जेल पहुंची। अधिकारी भी ऊंघते हुए नौ बजे के बाद ही जेल में कदम रखे।
बता दें कि ढाई महीने पूर्व ही जिला जेल में बंदी की मौत से भड़के बंदियों ने जम कर तांडव मचाया था। बावजूद इसके जिला पुलिस और प्रशासन की कार्यशैली में लापरवाही समझ से परे है। इस बाबत पूछने पर जेलर रामजी प्रसाद ने कहा कि, यदि अपने कार्यक्षेत्र में दोनों डाक्टर होते तो हो सकता है बंदी बच जाता। लेकिन मैं फोन करते-करते थक गया डा. ताहिर 14 घंटे बाद फोन उठाए। हमारे यहां से जिला अस्पताल 14 किमी दूर है। ऐसे में डाक्टरों का यहां होना तो बेहद जरूरी है। मामले से संबंधित पूर्ण जानकारी मैंने जिला प्रशासन और उच्चाधिकारियों को दे दी है। घटना के बाबत सिटी मजिस्ट्रेट अंजनी कुमार सिंह का कहना है कि, घटना की मजिस्ट्रेटियल जांच होगी। बंदियों के बयान के आधार पर प्रथमदृष्टया डाक्टर दोषी लग रहे हैं। लेकिन अंतिम निर्णय और घटना के संबंध में कुछ भी कह पाना जांच रिपोर्ट आने के बाद ही संभव हो पाएगा।

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