बंदी कब तक रहेंगे भगवान भरोसे...

Mau Updated Thu, 07 Jun 2012 12:00 PM IST
पुष्पेन्द्र कुमार त्रिपाठी
मऊ। जिला जेल में बंदियों के उपचार के नाम पर खानापूर्ति का सिलसिला अरसे से जारी है। जेल के बाद आखिरकार बंदियों को शरण जिला अस्पताल की ही लेनी पड़ती है। कहने को तो जेल में दो डाक्टर और एक फार्मासिस्ट की तैनाती है, लेकिन संसाधनों का अभाव और उस पर डाक्टरों की गैरहाजिरी अकसर बंदियों की जान पर बन आती है। बुधवार को मृत बंदी अनिल समेत अब तक छह बंदियों की बीमारी के चलते मौत हो चुकी है।
आजमगढ़ मंडल में सर्वाधिक क्षमता वाली जिला जेल में इस समय 471 कैदी हैं। जिन्हें 14 बैरकों में रखा जाता है। बीमार होने पर बंदियों का उपचार यदि जेल में हो गया तो हो गया, नहीं तो फिर जेल से 14 किमी दूर जिला अस्पताल ही जाना पड़ता है। बीच रास्ते में किसी की जान चली जाए तो वह ऊपर वाले के जिम्मे। वैसे सरकारी रजिस्टर के अनुसार, यहां स्थायी रूप से डा. मोहम्मद ताहिर और अस्थायी रूप से डा. राजेश राय और एक फार्मासिस्ट तैनात है। लेकिन दोनों डाक्टर साहब लोग अकसर ही गायब रहते हैं। डा. राजेश राय की ड्यूटी एक जून से जारी है, लेकिन वो जेल में पांच जून को दिखाई दिए। जेल की चरमराई स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर जेलर रामजी प्रसाद ने जिला जेल में 27 मार्च को तैनाती के बाद 15 अप्रैल, 16 अप्रैल, 2 मई, 16 मई और इसके अलावा भी कई बार जेल प्रशासन के उच्चाधिकारियों को अवगत कराया। लेकिन न स्थायी डाक्टर मिले और न ही मौजूदा डाक्टरों के कार्यप्रणाली में कोई सुधार आया।
इस संबंध में पूछने पर कल शाम से गैरहाजिर चल रहे डा. ताहिर ने कहा, यहां लेवल-3 यानी लगभग 10 वर्ष से ऊपर का अनुभव रखने वाले डाक्टरों की नियुक्ति का प्रावधान है और मैं लेवल- 1 का यानी मात्र दो साल का अनुभवी हूं। इसके अलावा लखनऊ में एक प्रशिक्षण भी लिया जाता है वह भी मेरे पास नहीं है। मैंने लिखित देकर यहां के लिए अपने आप को अयोग्य बताया था। बावजूद इसके कोई ध्यान नहीं दे रहा है।
गौरतलब है कि यह वही डाक्टर ताहिर हैं जो सईदुर्रहमान के मौत के समय भी जिला जेल में तैनात थे। मसला जो भी हो लेकिन बंदी अपनी जान के साथ खिलवाड़ होते देख काफी आक्रोश में हैं। जिला जेल से पेशी पर जाते समय बंदी सुनील सिंह ने बताया कि अकसर वही बंदियों का ब्लडप्रेशर नापता है। इस समय एक सप्ताह से बीपी मशीन खराब है। वहीं कचहरी पेशी पर पहुंचे बंदियों ने गाड़ी को पीटकर और जेल प्रशासन मुर्दाबाद के नारे लगा कर बंदीरक्षकों को काफी देर तक परेशान किए रखा। पेशी पर आए बंदी मो. सोहराब, सुरेंद्र, मनोज आदि ने कहा कि, अगर बंदियों को ऐसे ही मारना है तो बाहर कहीं ले जाकर मारें। अंदर मरने से हम लोग भी दहशत में आ जाते है कि न जाने कब अपना नंबर आ जाए। इस बाबत जेलर रामजी प्रसाद का कहना है कि, मुझसे जो भी हो सकता है मैं कर रहा हूं। जितने पत्र भेजा हूं आप देख ही लिए हैं। अब मैं क्या करूं, मुझे कभी-कभी खुद नहीं समझ में आता है। हालात जो भी हों, झेलना भी मुझे ही पड़ता है। आशा करता हूं कि जल्द ही व्यवस्था में सुधार होगा।

Spotlight

Most Read

Unnao

ट्रक में भिड़ी कार, एक की मौत

लखनऊ-आगरा एक्सप्रेस-वे पर शाहपुर तोंदा गांव के सामने ट्रक के अचानक ब्रेक लेने से पीछे आ रही तेज रफ्तार कार पीछे घुस गई। हादसे में चालक की मौत हो गई। साथी गंभीर रूप से घायल हो गया।

21 जनवरी 2018

Related Videos

कोहरे ने लगाया ऐसा ब्रेक, एक के बाद एक भिड़ीं कई गाड़ियां

वाराणसी-इलाहाबाद राजमार्ग पर गुरुवार को घने कोहरे के बीच दो एक सड़क हादसा हो गया। कोहरे की वजह से विजिबिलिटी कम होने पर एक के बाद एक चार गाड़ियां एक-दूसरे से टकरा गईं। इस हादसे में चार लोगों के घायल होने की भी खबर है।

21 दिसंबर 2017

आज का मुद्दा
View more polls
  • Downloads

Follow Us

Read the latest and breaking Hindi news on amarujala.com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala.com to get all the latest Hindi news updates as they happen.

E-Paper