मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु है अहंकार

Mau Updated Mon, 04 Jun 2012 12:00 PM IST
अमिला (संवाददाता)। स्थानीय कस्बे में चल रहे रामचरित मानस सम्मेलन में जौनपुर से पधारे देवेश दास रामायणी ने कहा कि अहंकार मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु है। जो जीव का अहंकार ही उसके नष्ट का कारण बनता है। ईश्वर सदैव अपने भक्त में कभी भी अहंकार नहीं रखने देते।उन्होंने भक्तों की रक्षा ईश्वर स्वयं करता है। जीवन क्षणभंगुर होता है। सांसारिक जीवन से मुक्ति सत्संग से मिल सकती है। राम के आदर्श चरित्र का अनुसरण कर व्यक्ति अपने आपको महान बना सकता है।
इसी क्रम में रमाशंकर सिंह ने हनुमत चरित्र का मनोरम चित्रण प्रस्तुत करते हुए कहा कि अगर राम, लक्ष्मण भरत आदि वीर हैं तो हनुमान जी महावीर है। इसी तरह मधुसूदन शास्त्री, रितेश राय, राममनोहर रामायणी आदि ने रामकथा का रसपान कराया। कथा के अंत में रामचरित मानस की आरती कर प्रसाद वितरण हुआ। कथा का प्रारंभ हनुमान चालीसा के पाठ से हुआ। कार्यक्रम में रामप्रसाद कुशवाहा, अशोक कुमार ओझा, शिवनाथ साहू, अखिलेश्वर शुक्ल, प्रवेश कुमार गुप्त, रामधनी कुशवाहा, राजन, मुन्नीलाल रहे।

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