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मिलन केंद्रों को नहीं नसीब हो पाई छत

Mau Updated Fri, 11 May 2012 12:00 PM IST
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मऊ। जिले में बनने वाले सामुदायिक मिलन केंद्र छत के अभाव में अर्धनिर्मित पड़े हुए हैं। गांवों में एक ही स्थान पर विभिन्न सार्वजनिक कार्यों के लिए बनने वाले यह भवन विभागीय उपेक्षा के चलते धूल फांक रहे हैं। दीवारें खड़ी हैं लेकिन धन न होने से महीनों से कार्य ठप है। बदले निजाम में इन्हें छत भी नसीब हो पाएगी कि नहीं इसे लेकर भी लोगों में संशय बना हुआ है।
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जिले के 75 अंबेडकर गांवों में वर्ष 2011-12 में 45 सामुदायिक मिलन केंद्र बनने थे। इन सामुदायिक मिलन केंद्रों का उद्देश्य यह था कि इसमें छोटे मोटे कार्यक्रम, बैठक आदि आयोजित कराने के लिए एक भवन का निर्माण हो सका। पूर्ववर्ती सरकार में जिले के 45 अंबेडकर गांवों में 45 सामुदायिक मिलन केंद्र खोलने की स्वीकृत मिली। इसके लिए शासन से सात करोड़ 69 करोड़ 50 हजार का बजट स्वीकृत भी हो गया है। यूपीपीसीएल और पैकपेड निर्माण कार्यदायी संस्थाओं को इसके निर्माण की जिम्मेदारी सौंपी गई। इनमें दो करोड़ 92 लाख 50 हजार धन अवमुक्त भी हो गया। इस धन से कार्य तो सभी 45 सामुदायिक केंद्रों का शुरू हुआ लेकिन बाद में इसके लिए और धन न मिलने पर महीनों से इसकी दीवारें धूल फांक रही है। सरकार बनने के बाद इन सामुदायिक मिलन केंद्रों को छत भी नसीब हो पाएगी कि नहीं इसे लेकर भी संशय बना हुआ है। भवन के पूर्ण न होने से संबंधित गांव के लोगों में निराशा है कि कहीं पिछली सरकार की योजना मानकर इस पर आगे का निर्माण ही न कराया जाए। ऐसे में गांव में एक सार्वजनिक भवन बनने का सपना अधूरा ही रह जाएगा। इस संबंध में मुख्य विकास अधिकारी कैलाश प्रकाश का कहना है कि नई सरकार में अभी पिछली योजनाओं के बारे में कोई दिशा निर्देश नहीं आया है। जो कार्य धन के अभाव में अधूरे पड़े हैं उन्हें बजट आते ही पूरा कराया जाएगा।
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