मोरों के जीवन पर मंडरा रहा खतरा

Mau Updated Thu, 10 May 2012 12:00 PM IST
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मऊ। रतनपुरा ब्लाक के सिधवल गांव के रेनुआ वन में निवास करने वाले वन्य जीव जंतुओं पर संकट गहराता जा रहा है। राष्ट्रीय पक्षी मोर पर तो आफत ही आ गई है। यह पक्षी अज्ञात बीमारी के चपेट में आ रहे हैं। कई पक्षियों के मरने से पर्यावरण प्रेमियों के माथे पर चिंता की लकीरें दिखाई दे रही है। वहीं मोरों के मरने से प्राकृतिक संतुलन बिगड़ने का खतरा बढ़ गया है। बावजूद वन विभाग के आला अधिकारियों को अभी तक भनक नहीं लग सकी है।
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सिधवल गांव में रेनुआ वन लगभग 12 बीघा में फैला हुआ है। इसमें मोरों की संख्या काफी है। इधर तीन दिनों में आधा दर्जन से अधिक मोर काल के गाल में समा चुके हैं। ग्रामीणों की माने तो मोर अज्ञात बीमारी की चपेट में आ रहे हैं। जबकि वन विभाग के आला अधिकारियों के अनुसार मोर के मरने की कई वजहें हो सकती हैं जैसे भीषण गर्मी, पानी की कमी या कोई अन्य बीमारी। वहीं मोरों के मरने का सिलसिला जारी रहने से पर्यावरणविदों की चिंता बढ़ती जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार मोरों की संख्या में गिरावट होने से प्राकृतिक संतुलन बिगड़ने का खतरा बढ़ सकता है।
उनका मानना है कि मोर विषैले जंतुओं को खा जाता है। इससे प्राकृतिक संतुलन बना रहता है। इस संबंध में सिधवल गांव के ओमप्रकाश यादव, संजय यादव, परमानंद यादव, सिंहासन राम, रामअवध प्रजापति का कहना है कि वन्य जीव जंतुओं के संरक्षण के लिए महकमा तथा प्रशासन की ओर से कुछ भी नहीं किया जा रहा है। शिकारियों की हमेशा गिद्ध दृष्टि लगी रहती है। कई दिनों से मोरों के मरने का सिलसिला जारी है, लेकिन अधिकारियों ने सुधि लेने की जहमत तक नहीं उठाई है। इस बाबत प्रभागीय निदेशक सामाजिक वानिकी के इलांगो का कहना है कि अभी तक मामले की जानकारी नहीं है। मोर के मरने की कई वजहें हो सकती है। मौका मुआयना के बाद ही कुछ कहा जा सकता है।
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